अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रवासी विरोधी नीति के चलते भले ही मैक्सिको और दूसरे देशों के प्रवासी निशाने पर रहे हों, लेकिन अमेरिकी सांसद और उद्योगपतियों का एक बड़ा वर्ग भारतीय प्रवासियों का पक्षधर रहा है। एच1बी वीजा नीतियों में सख्ती का अमेरिकी सांसदों का एक बड़ा समूह विरोध कर रहा था। अमेरिकी अर्थशास्त्रियों का भी मानना है कि भारतीयों के जाने से अमेरिका की प्रतिभा, ज्ञान, अर्थ और तकनीक की ताकत कम होगी। आइए जानते हैं वहां रहने वाले भारतीय अमेरिका के लिए क्यों अहम हैं।
एक फीसदी आबादी
अमेरिका में 30 लाख से ज्यादा भारतीय हैं, जो अमेरिका की कुल आबादी का एक फीसदी हिस्सा है। कंप्यूटर और आईटी क्रांति ने बड़ी संख्या में भारतीयों को अमेरिका पहुंचाया। 1997 से लेकर 2013 तक आधे एच1बी वीजा भारतीयों को मिले। एक अनुमान के मुताबिक 2030 तक अमेरिका में रहने वाले भारतीयों की संख्या दोगुनी हो जाएगी और वह उसकी कुल आबादी का दो फीसदी हो जाएंगे।
ज्यादातर स्थायी निवासी
अमेरिका में रहने वाले ज्यादातर भारतीयों को स्थायी निवास का अधिकार (ग्रीन कार्ड) मिल चुका है। सिर्फ पांच लाख से 7.5 लाख भारतीय एच1बी वीजा पर रह रहे हैं।
सबसे ज्यादा शिक्षित
19वीं शताब्दी में श्रमिकों के रूप में भारतीयों ने अमेरिका जाना शुरू किया था, लेकिन प्यू की रिपोर्ट के मुताबिक आज अमेरिका में भारतीय समुदाय ही सबसे ज्यादा शिक्षित है। वहां रहने वाले 25 साल से ज्यादा उम्र के 70 फीसदी भारतीयों के पास कालेज डिग्री है। जब अमेरिका में सिर्फ औसतन 28 फीसदी लोगों के पास कालेज डिग्री है।
सबसे अमीर
अमेरिकी भारतीयों की आय 88 हजार डॉलर प्रति वर्ष है। जबकि अमेरिका की औसत आय 49,800 डॉलर है।
विज्ञान और इंजीनियरिंग में जलवा
28 फीसदी भारतीय अमेरिका में इंजीनियरिंग क्षेत्र में काम कर रह हैं। सिर्फ पांच फीसदी अमेरिकी ही इंजीनियर हैं। अमेरिका में रहने वाले 69.3 फीसदी भारतीय प्रबंधन, विज्ञान, व्यापार और कला क्षेत्र से जुड़े हैं।
प्रशासन में धमक
यूएन में अमेरिका की दूत निक्की हेली, पूर्व गवर्नर बॉबी जिंदल और सांसद कमला हैरिस समेत बड़ी संख्या में भारतीयों की प्रशासन में धमक है। पेप्सी की सीईओ इंदिरा नूरी, माइक्रोसाफ्ट के सत्य नडेला और गूगल के सुंदर पिचाई उद्योग जगत में अपनी चमक बिखेर रहे हैं।