मुल्ला अख्तर मंसूर को पाक की धरती पर निशाना बनाए जाने से पाक जरूर भड़का हुआ है, लेकिन अमेरिकी मीडिया ने इस ड्रोन हमले के लिए पाक को ही जिम्मेदार ठहराया है। उसके मुताबिक आतंकवाद से निपटने में पाकिस्तानी की नाकामी ने ही अमेरिका को अपना धैर्य खोने पर मजबूर कर दिया है और उसी का परिणाम है यह ड्रोन हमला। वहीं, पाक ने इस हमले को काफी गंभीरता से लेते हुए सोमवार को पाकिस्तान में अमेरिकी राजदूत डेविड हेल को तलब किया और इस हमले के प्रति सख्त नाराजगी जताई।
पाकिस्तान ने इस मामले को देश की संम्प्रभुता पर हमला करार देते हुए इसे संयुक्त राष्ट्र के चार्टर का भी उल्लंघन बताया। यह चार्टर के तहत आने वाले देश एक-दूसरे की सीमाओं का उल्लंघन नहीं करेंगे लेकिन अमेरिका ने ऐसा दूसरी बार किया। वहीं पाक के इस विरोध का जवाब देते हुए अमेरिकी प्रशासन ने यह साफ कर दिया कि वह पाकिस्तान की संम्प्रभुता का सम्मान करता है लेकिन ऐसे आतंकियों को मार गिराने के लिए वह आगे भी ऐसा करता रहेगा।
इस हमले के बारे में न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी के हवाले से लिखा, ‘पाक आतंकवाद से निपटने में नाकाम साबित हो रहा है। इससे ओबामा प्रशासन अब धैर्य खोने लगा है और अफगान तालिबान को निशाना बनाकर पाक की धरती पर किया गया यह हमला भी उसी का परिणाम था।’ वाशिंगटन पोस्ट ने इस हमले को पाक की धरती पर अफगानिस्तान के खिलाफ पनप रहे आतंकवाद के खिलाफ एक और कार्रवाई बताया।
'हमारे देश में नहीं था मुल्ला मंसूर'
अफगानिस्तान में हवाई हमला
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वहीं, पाक अखबार ‘द नेशन’ ने लिखा कि इस हमले के बाद दोनों देशों के रिश्ते और खराब हो सकते हैं। अखबार ने आगे लिखा है कि वाशिंगटन को लगता है कि इस्लामाबाद उसके साथ डबल गेम खेल रहा है।वहीं, डॉन ने लिखा कि अमेरिका ने इस हमले के साथ ही रेड लाइन को क्रॉस कर लिया है। डॉन के मुताबिक रविवार को हुए हमले से पाक नेतृत्व को ये डर सताने लगा है कि कहीं अमेरिका अपने ड्रोन हमलों का सिलसिला उसके शहरों में भी न शुरू कर दे।
रविवार को मुल्ला मंसूर के मारे जाने की खबर को खारिज करने वाले अफगान तालिबान ने सोमवार को उसके मारे जाने की पुष्टि कर दी है। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि मंसूर का मारा जाना नींव का पत्थर साबित होगा और अब अफगान शांति वार्ता बहाल हो सकेगी।
ईरान ने पाक सुरक्षा अधिकारियों के उस दावे को खारिज किया है, जिसमें कहा गया था कि मुल्ला मंसूर ईरान सीमा पार कर पाकिस्तान पहुंचा था।