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रूस से आगे निकलने को अमेरिका 8 साल बाद भेज पाया चांद पर मानव, अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री का खुलासा

Mon, 03 Sep 2018 04:37 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री फ्रेंक बोरमैन।
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अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री फ्रेंक बोरमैन ने 50 साल बाद एक बेहद अहम खुलासा किया है। अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री फ्रेंक बोरमैन ने बताया कि अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस में भेजने का अमेरिका का अहम मकसद तत्कालीन सोवियत संघ (रूस) से आगे निकलना था न कि चांद पर इंसान को उतारना। 

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आपको बता दें कि तत्कालीन सोविय संघ (रूस) ने 1961 में पहली बार मानव (यूरी गागरिन) को अंतरिक्ष भेजा था जबकि अंतरिक्ष में रूसी यान के आठ साल बाद अमेरिका ने चुनौती मानते हुए साल 1969 में अपोलो-11 मिशन के तहत मानव को चांद पर उतारा। अमेरिका ने  अपोलो मिशन 1961 में शुरू किया था जो 1972 तक चला था। 

90 साल के बोरमैन ने बताया कि केवल 30 सेकेंड के लिए अंतरिक्ष जाना रोमांचक था, इसके बाद मैं बोर होने लगा था। बोरमैन 1968 में अमेरिका के अपोलो-8 मिशन का हिस्सा थे। बताया जाता है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ (रूस) के बीच अनकही प्रतिस्पर्धा का दौर शुरू हुआ। इसे शीत युद्ध (कोल्ड वार) नाम दिया गया था। दोनों देश हर क्षेत्र में एक-दूसरे पीछे छोड़ना चाहते थे। इसी कड़ी में अमेरिका ने रूस को कड़ी टक्कर देते हुए चांद पर मानव को उतारने के प्रयास तेज कर दिए।   
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साक्षात्कार के दौरान पहली बार चांद का चक्कर लगाने वाले अमेरिका अंतरिक्ष यात्री फ्रेंक बोरमैन ने बताया कि अंतरिक्ष में जाने के बाद उन्हे घर आने की जल्दी थी, उन्होंने बताया मैंने अंतरिक्ष कार्यक्रम के बारे में अपने परिवार वालों से कभी कोई बात नहीं की।

फ्रेंक बोरमैन ने कहा कि शून्य गुरुत्वाकर्षण में यात्रा करना उन्हें अच्छा नहीं लग रहा था क्योंकि चांद की परिक्रमा करते हुए उन्हें बड़े-बड़े गड्ढे दिखाई दे रहे थे। उन्होंने बताया कि बेशक धरती से दीदार करने पर चांद सुंदर दिखाई देता है लेकिन वहां पर सुंदरता जैसी कोई चीज नहीं है। 
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