अमेरिका ने बांग्लादेश से रोहिंग्या शरणार्थियों की म्यामांर में स्वैच्छिक और सम्मानजनक वापसी की मांग करते हुए कहा कि ढाका को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें तमाम गतिविधियों की स्वतंत्रता हो और वे ‘शिविरों तक ही सीमित ना रहें।’ ढाका और ने पी तौ के बीच पिछले महीने लाखों रोहिंग्या मुस्लिमों की मध्य नवंबर में देश वापसी पर सहमति बनी थी।
यह रोहिंग्या शरणार्थी म्यामांर सेना के चलाए गए अभियान के बाद देश छोड़कर बांग्लादेश चले गए थे। समझौते के तहत पहले जत्थे में बांग्लादेश से 2,000 रोहिंग्या मुसलमान म्यांमा जाएंगे। इसके बाद दूसरा जत्था रवाना होगा। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने रविवार को एक बयान में कहा कि हमने दोनों सरकारों के उच्च स्तर के अधिकारियों को समय से पहले वापसी को लेकर अपनी गंभीर चिंताओं से अवगत करा दिया है।
इस बात पर जोर दिया गया कि अंतरराष्ट्रीय परिपाटी के अनुरूप स्वैच्छिक, सुरक्षित, और सम्मानित तरीके से वापसी हो। इसके अलावा म्यामां वापसी के बाद उन्हें तमाम गतिविधियों की आजादी हो और वे शिविरों तक ही सीमित ना रहें। साथ ही, विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह संयुक्त राष्ट्र में शरणार्थियों के उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) के उस आकलन से भी सहमत है, जिसमें कहा गया है कि रोहिंग्या शरणार्थियों की वापसी के लिए म्यामां में स्थिति अभी पूरी तरह अनुकूल नहीं है।