अमेरिकी सरकार ने कहा है कि थ्रीडी प्रिंटर तकनीक से तैयार बंदूक से जुड़ी ऐसी जानकारियां जोकि ऑनलाइन माध्यमों पर उपलब्ध हैं, हटा ली जाएं।
यह फैसला उस वक्त आया है जबकि प्लास्टिक से बनी इन बंदूकों का इंटरनेट पर मौजूद ब्लूप्रिंट का एक लाख से भी अधिक बार डाउनलोड किए जाने की जानकारी उभकर सामने आई।
अमेरिकी विदेश विभाग ने इस बंदूक के डिजाइनर डिफेंस डिस्ट्रीब्यूटेड से कहा है कि इसके ब्लूप्रिंट को ऑनलाइन माध्यमों पर प्रसारित करने से हथियारों से जुड़े नियम-कायदों का उल्लंघन हो सकता है।
हालांकि कंपनी की वेबसाइट ‘डिफकेड’ पर मौजूद फाइलें हटा ली गई हैं। फिर भी यह स्पष्ट नहीं है कि क्या लोग अभी भी इस थ्री डी बंदूक की ब्लूप्रिंट तक पहुंच पा रहे हैं।
डाउनलोडिंग
ऑनलाइन सेवाएं देने वाली कंपनी मेगा इस वेबसाइट का प्रबंधन देख रही है।
थ्री डी बंदूक की ब्लूप्रिंट इंटरनेट पर फाइल शेयर करने वाली कई वेबसाइट्स पर प्रसार के लिए व्यापक तौर उपलब्ध हैं।
डिफेंस डिसट्रिब्यूटेड के संस्थापक कॉडी विल्सन ने बीबीसी को बताया कि जिन्न अब बोतल से बाहर आ चुका है।
वह कहते हैं, "जैसे ही लोगों ने सुना कि कुछ हुआ है। फाइल शेयरिंग वेबसाइट पर लोगों की बाढ़ सी आ गई। मैं यहां बैठा डाउनलोडिंग की चढ़ती हुई डिमांड देख पा रहा हूं।"
रक्षा व्यापार से जुड़े नियम कायदों पर निगरानी रखने वाले महकमे के दफ्तर ने विल्सन को लिखा है कि जब तक वे यह साबित न कर दें कि उन्होंने कोई कानून नहीं तोड़ा है इस थ्री डी तकनीक से तैयार बंदूक से जु़ड़ी ऑनलाइन माध्यमों पर उपलब्ध सूचनाएं आम लोगों की पहुंच से हटा ले।
क्या है थ्री डी प्रिंटर?
थ्री-डी प्रिंटर तकनीक को उत्पादन का भविष्य माना जा रहा है। इस तकनीक में एक के ऊपर एक प्लास्टिक की परत चढ़ाकर कठोर वस्तुएं तैयार की जाती हैं।
इसके पीछे ये सोच है कि किसी सामान को दुकान से खरीदने के बजाय प्रिंट कर लेना ज्यादा आसान और बेहतर है।
इस तकनीक में उपभोक्तातों को ये आसानी होगी कि वो घर में ही अपनी पसंद की डिजाइन डाउनलोड करके सामान प्रिंट कर लें।
ऑन लाइन नीलामी करने वाली वेबसाइट ई बे के मुताबिक जिस थ्री डी प्रिंटर की सहायता से इसे बनाया गया है उसकी लागत 8000 डॉलर है।
गन के अलग-अलग हिस्सों को एबीएस प्लास्टिक की सहायता से बनाया गया था. इसे बाद में जोड़कर एक किया गया। केवल फायरिंग पिन को धातु से बनाया गया था।