वैज्ञानिकों का मानना है कि डिजिटल होलोग्राफी तकनीक एलियंस के बारे में पता लगाने का सबसे बेहतर दांव हो सकती है। इस तकनीक में 3डी इमेज के लिए लेजर का इस्तेमाल किया जाता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, नासा के विकिंग प्रोग्राम के तहत कोई भी अंतरिक्ष यान या अभियान एलियंस के जीवन पर प्रकाश नहीं डाल सका है।
हालांकि नासा का ध्यान 1970 से जारी इन कोशिशों के तहत पानी की खोज में जरूर रहा है। शनि के बर्फीले चंद्रमा एनसेलेडस पर पानी के बड़े भंडार की मौजूदगी का पता चला है, लेकिन अगर यहां जीवन का अस्तित्व है तो वह सूक्ष्म जीवों के रूप में हो सकता है।
वैज्ञानिकों के लिए धरती से 79 करोड़ मील की दूरी से इन सूक्ष्म जीवों की पहचान करना काफी मुश्किल भरा काम है। अमेरिका के कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर जे नादेउ ने कहा कि सूक्ष्मजीव और धूल के कणों के बीच पहचान करना कठिन काम है।
उन्होंने कहा कि इस मुश्किल भरे काम को आसान बनाने में व संभावित सूक्ष्म जीवों के अध्ययन में 3डी होलोग्राफी तकनीक कारगर हो सकती है।