मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के 20 से ज्यादा देशों में अमेरिकी दूतावासों को शनिवार तक अस्थायी रूप से बंद करने के फैसले ने एक बार फिर चरमपंथी संगठन अल कायदा के खतरे की तरफ ध्यान आकर्षित किया है।
इससे पहले अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों ने इस क्षेत्र में अपने दूतावास बंद रखे।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय का कहना है कि मध्य पूर्व और उत्तर अफ्रीका में अल कायदा के हमलों का सबसे ज्यादा खतरा है।
बताया जाता है कि अल कायदा के कुछ संदेश पकड़े जाने के बाद दूतावासों को बंद करने और दुनिया भर में अमेरिकी नागरिकों के लिए क्लिक करें यात्रा संबंधी अलर्ट जारी करने का फैसला किया गया है।
अल कायदा के खिलाफ अभियान में अमेरिकी सैन्य बलों को 2 मई 2011 को बड़ी कामयाबी मिली थी जब विशेष सैन्य टुकड़ी नेवी सील्स ने ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था।
लेकिन अब भी अल कायदा के कुछ ऐसा नेता हैं जो बराबर चुनौती बने हुए हैं।
अयमान अल ज़वाहिरी
अयमान अल ज़वाहिरी आंखों के सर्जन रहे हैं और उन्होंने मिस्र के चरमपंथी संगठन इस्लामिक जिहाद की स्थापना में अहम भूमिका अदा की है। ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद जून 2011 में ज़वाहिरी को अल कायदा का नेता बनाया गया।
वैसे ओसामा बिन लादेन के रहते भी ज़वाहिरी संगठन में अहम भूमिका निभा रहे थे। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका पर हुए 11 सितंबर 2001 के हमलों के पीछे मुख्य तौर पर जवाहिरी का ही दिमाग लगा था।
अमेरिका ने 2001 में जिन 22 'सबसे वांछित आंतकवादियों की सूची' जारी की थी उसमें ज़वाहिरी ओसामा बिन लादेन के बाद दूसरे नंबर पर थे और उनके सिर पर ढाई करोड़ डॉलर का इनाम है।
ज़वाहिरी कभी अल कायदा के सबसे अहम प्रवक्ता थे। 2003 के बाद से उनके लगभग 40 वीडियो और ऑडियो टेप सामने आए हैं। उनका पिछला वीडियो अप्रैल 2011 में आया था।
ज़वाहिरी पर उत्तरी अफ्रीका में अमेरिकी दूतावासों पर हमले कराने के भी आरोप हैं। इसके अलावा मिस्र में उन्हें अनुपस्थिति में जिहादी गतिविधियों के लिए मौत की सजा सुनाई जा चुकी है।
अबु याहया अल-लीबी
अमेरिकी अधिकारी मानते हैं कि अबु याहया अल–लीबी 4 जून 2012 को पाकिस्तान के क़बायली इलाकों में हुए ड्रोन हमले में मारे जा चुके हैं, लेकिन पाकिस्तान में सूत्रों ने उनकी मौत की पुष्टि नहीं की।
लीबी को हसन क़ायद और यूनिस अल-सहरावी के नाम से भी जाना जाता है। समझा जाता है कि ओसामा बिन लादेन के साथ आने से पहले वो लीबियाई इस्लामी फाइटिंग ग्रुप के सदस्य थे।
बाद में वो अयमान अल-ज़वाहिरी के स्थान पर अल कायदा के वीडियो और टेपों में नज़र आने लगे।
समझा जाता है कि लीबी ने 1990 के दशक में मॉरिटानिया के एक मदरसे में पांच साल गुजारे थे।
लीबी का दावा है कि पाकिस्तानी सैनिकों ने उन्हें 2002 में पकड़ कर अफगानिस्तान के बगराम में अमेरिकी हवाई ठिकाने भेज दिया गया था, जहां से वो जुलाई 2005 में अल कायदा के अन्य सदस्यों के साथ भाग निकलने में कामयाब रहे।
अल कायदा ने लीबी को अफगानिस्तान में फील्ड कमांडर बनाया था लेकिन बाद में वो बहुत से वीडियो में खुद को धार्मिक विद्वान के तौर पर पेश करते नज़र आए।
ख़ालिद अल हबीब
ख़ालिद अल हबीब का संबंध या तो मिस्र से या है मोरक्को से। नवंबर 2005 में एक वीडियो में उनकी पहचान दक्षिण पूर्वी अफगानिस्तान में अल कायदा के फील्ड कमांडर के तौर पर की गई थी, जबकि अब्द अल-हदी अल-इराकी को दक्षिण पश्चिम का कमांडर बताया गया था।
समझा जाता है कि 2006 में अल-इराकी को पकड़ लिए जाने के बाद के सारी कमांड खालिद अल हबीब के हाथों में आ गई।
जुलाई 2008 में उन्हें अल कायदा का सैन्य कमांडर बताया गया।
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि ख़ालिद अल हबीब अफगानिस्तान और उत्तरी पाकिस्तान में अल कायदा के अंदरूनी अभियानों की ज़िम्मेदारी संभालते हैं।
अदनान एल शुक्रीजुमा
अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के अनुसार अदनान गुलशेर एल शुक्रीजुमाह ने अल कायदा की 'बाह्य अभियान परिषद' के प्रमुख का पद संभाल रखा है।
वो 15 साल तक अमेरिका में रहे हैं, इसलिए वहां के समाज को अच्छी तरह जानते हैं। बताया जाता है कि शुक्रीजुमा को अफगानिस्तान के बाहर हमलों की रणनीति बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कभी ये पद खालिद शेख मोहम्मद के पास था जिन्हें 9/11 के हमलों का कथित मास्टरमाइंड माना जाता है।
सऊदी अरब में पैदा हुए शुक्रीजुमा अपने माता पिता के साथ बचपन में ही अमेरिका चले गए थे।
माना जाता है कि 1990 के दशक में उन्हें विश्वास हो चला था कि उन्हें चेचन्या जैसी जगहों पर जेहाद करनी है और वो अफगानिस्तान में ट्रेनिंग के लिए चले गए।
अमेरिकी आरोप पत्र में शुक्रीजुमा को न्यूयॉर्क में 2009 के आत्मघाती हमलों के सिलसिले में साजिशकर्ता बताया गया है। पनामा, नॉर्वे और ब्रिटेन में भी उन्हें हमलों की साज़िश रचने का संदिग्ध माना जाता है।
सैफ़ अल-अदेल
मिस्र के सैफ़ अल-अदेल की उम्र 50 वर्ष के आसपास है और वो 1980 के दशक में अफगानिस्तान गए और मुजाहिदीनों के साथ मिलकर सोवियत सेना के खिलाफ लड़े।
अदेल एक समय ओसामा बिन लादेन के सुरक्षा प्रमुख थे और अल कायदा के सैन्य कमांडर मोहम्मद अतेफ की नवंबर 2001 में मौत के बाद उनकी कई जिम्मेदारियां भी अदेल को दी गईं।
अदेल 1998 में पूर्वी अफ्रीका में अमेरिकी दूतावासों पर हुए हमले के संदिग्ध माने जाते हैं।
1993 में सोमालिया की राजधानी मोगादिशु में 18 अमेरिकी सैनिकों की हत्या करने वाली सोमाली लड़कों को ट्रेनिंग देने के आरोप भी अदेल पर लगते हैं।
1987 में मिस्र में अदेल पर चरमपंथी इस्लामी संगठन अल-जिहाद की सैन्य शाखा स्थापित करने और सरकार को अस्थिर करने के आरोप लगे।
मुस्तफ़ा हामिद
मुस्तफ़ा हामिद सैफ़ अल-अदेल के ससुर हैं और जलालाबाद के पास अल कायदा के शिविर में ट्रेनिंग देने का काम कर चुके हैं।
अमेरिका के अनुसार मुस्तफ़ा हामिद अल कायदा और ईरान की सरकार के बीच संपर्क का काम करते रहे हैं।
माना जाता है कि अफगानिस्तान में तालिबान को सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद मुस्तफ़ा हामिद ने अल कायदा के नेताओं और उनके परिवारों को ईरान में सुरक्षित जगहों पर स्थानांतरित करने में अहम भूमिका निभाई।
लेकिन 2003 के मध्य में ईरानी अधिकारियों ने हामिद को गिरफ्तार कर लिया।
साद बिन लादेन
साद बिन लादेन ओसामा बिन लादेन के बेटों में से एक हैं और अल कायदा की गतिविधियों में शामिल रहे हैं। 2001 में उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को ईरान भागने में मदद की थी।
उन्होंने अल कायदा के लिए कई अहम फैसले लिए और वो अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ईरान से संगठन चला रहे छोटे छोटे गुटों के सदस्य रहे हैं।
उन्हें 2003 में ईरानी अधिकारियों ने गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन हालिया रिपोर्टें कहती हैं कि संभवतः उन्हें रिहा कर दिया गया है और वो उत्तरी पाकिस्तान में चले गए।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ओसामा बिन लादेन का एक व्यस्क बेटा उनके साथ ही एबटाबाद में मारा गया था लेकिन ये साफ नहीं है कि ये साद ही थे या कोई और।