डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही एच-1बी वीजा पर खत्म होने के बादल मंडराए हुए हैं। इसी बीच एक ऐसी रिसर्च सामने आई है जिसमें कहा गया है कि एच-1बी वीजा अमेरिकियों के लिए फायदेमंद है। शोधकर्ताओं ने पाया कि हाई स्किल विदेशी इंजीनियरों की वजह से देश के नवीनता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
इसकी वजह से अमेरिका के विकास में मदद मिल रही है। साथ ही अमेरिकियों के समग्र कल्याण में वृद्धि हुई है और आईटी क्षेत्र में कंपनियों के लिए लाभ काफी बढ़ा है। इमिग्रेशन ने कीमतों में कमी की और आईटी माल का उत्पादन 1.9 प्रतिशत और 2.5 प्रतिशत के बीच बढ़ाया है, जिससे उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचा है।
ये शोधकर्ता कैलिफोर्निया और मिशिगन यूर्निवर्सिटी के हैं। शोधकर्ता जॉन बॉन्ड और निकोलस मोराल्स ने कहा कि विदेशी इंजीनियरों और वैज्ञानिकों के काम करने से यूए के इकोनॉमी को फायदा होता है।शोधकर्ता ने 1994 से 2001 के बीच इस शोध को किया जिसमें उन्होंने पाया कि कम सैलरी में आने वाले विदेशियों की वजह से आईटी का ग्रोथ रेट 1.9 फीसदी से बढ़कर 2.5 फीसदी हो गया है। इतना ही नहीं इस अप्रवासियों की वजह से आईटी कंपनियां बड़े मुनाफे को हासिल करती हैं।
ग्रीन कार्ड आधारित एच-1 बी वीजा श्रेणी और नियुक्तियां अमेरिका में भारतीय अमेरिकियों के बीच काफी प्रसिद्ध है। गौरतलब है कि इस वीजा का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल भारतीय आईटी प्रोफेशनल द्वारा किया जाता है। अगर ट्रंप प्रशासन ने इस मामले में कोई सख्ती दिखाई तो इससे भारतीय आईटी सेक्टर को काफी नुकसान हो सकता है। भारतीय आईटी प्रोफेशल्स आमतौर पर 85,000 एच -1बी वीजा का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा लेते हैं।