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अमेरिका चुनावः मतदान के वक्त 5 तरह की हैकिंग का डर

Tue, 08 Nov 2016 04:38 AM IST
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस/ वाशिंगटन
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पूरी दुनिया में ऑनलाइन मतदान तकनीकी का चलन बढ़ने के कारण इस बार के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव पर भी पूरी दुनिया की निगाह लगी हैं। दलीले है कि यदि हैकर डेमोक्रेटिक पार्टी की नेशन कमेटी के सर्वर में सेंध लगा सकते हैं तो फिर वे वोटिंग सिस्टम के साथ भी ऐसा ही कर सकते हैं।
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आईटी सिक्योरिटी एक्सपर्टों और अमेरिकी अधिकारियों को भी अब हैकिंग में रूस सरकार का हाथ होने का शक है। हालांकि रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने इस बात को खारिज कर दिया है कि वह मंगलवार को अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव में हस्तक्षेप करने का सामर्थ्य रखते हैं, लेकिन अमेरिका में सुरक्षा अधिकारी इस कवायद में लगे हैं कि किस स्तर पर हैकिंग की आशंका संभव है। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने पांच तरह की हैकिंग पर आशंका जताई है -

मतदाता सूची में गड़बड़ी की आशंका (संभव लेकिन असर छोड़ने में नाकाम)

अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई केंद्रीय मतदाता रजिस्ट्रेशन डाटाबेस की हैकरों द्वारा जांच के प्रति एरिजोना और इलिनोइस प्रांतों को चेता चुकी है। इस डाटाबेस में वैध मतदाताओं की सूची है। इसमें मतदाताओं के पते और उनसे जुड़ी जरूरी जानकारी है। हैकिंग द्वारा मतदाताओं के पते और अन्य सूचनाओं में कुछ हेरफेर करने की आशंका जताई गई है। इस तरह कई मतदाताओं को मतदान प्रक्रिया से दूर किया जा सकता है।

समाचार एजेंसियों की मतगणना सूचना में हेराफेरी (खतरा है लेकिन सही परिणाम छुप नहीं सकते)

इस बात की आशंका है कि मंगलवार को मतदान के बाद शाम को जब समाचार एजेंसियां अनधिकृत रूप से स्विंग स्टेट में परिणाम की जानकारी लेते वक्त उन तक पहुंचने वाला डाटा गड़बड़ कर दें। इस तरह स्थानीय केंद्रों को भेजी जाने वाले समाचार में गड़बड़ी संभव है। लेकिन इसका विशेष लाभ हैकरों को नहीं मिल पाएगा, क्योंकि यह केवल अनधिकृत डाटा होता है। अंतिम परिणामों की अधिकृत घोषणा के साथ ही यह हेराफेरी उजागर हो जाएगी।

चुनाव में इंटरनेट कनेक्टिविटी भंग करके (यह बड़ी चिंता का विषय हो सकता है)

हाल ही में 21 अक्टूबर को जब वेब सेवाओं के लिए उपकरण बनाने वाली एक कंपनी के सर्वर पर शातिर अंदाज में साइबर हमला हुआ तब इंटरनेट कनेक्शन काफी धीमी गति का शिकार हो गया था। अमेरिकी आम चुनाव पर भी ऐसे ही किसी हमले की आशंका है। अमेरिका के मुख्य सुरक्षा अधिकारी एंडी एलिस ने कम्प्यूटरों पर ऐसे हमले की आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि ऐसे हमले के खिलाफ रक्षा करना बहुत मुश्किल होगा। 

वोटिंग मशीनों में गड़बड़ी (बहुत मुश्किल, लेकिन असंभव नहीं)

यद्यपि मतदान से पहले अधिकांश मशीनों को अपडेट करने के बाद ऑफ लाइन कर दिया जाएगा, इसलिए इनमें डर की आशंका नहीं होगी। लेकिन डीएस-200 जैसी कुछ मशीनें कई जिलों में इस्तेमाल की जाएंगी। इनमें वैकल्कि रूप से वायरलेस सुविधा भी होगी। इन मशीनों में वायरलेस कनेक्शन काफी नाजुक होता है जिनमें गड़बड़ी की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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बहुत आसान नहीं हैकिंग, लेकिन असंभव भी नहीं

हैकिंग को लेकर अमेरिकी खुफिया एजेंसी की चिंता अपनी जगह है लेकिन निर्वाचन विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव में हैकिंग आसान नहीं है। चुनाव प्रक्रिया विशेषज्ञ डेविड बेकर कहते हैं कि निजी ईमेल में या निजी कंपनी के सर्वर को हैक करना चुनाव सिस्टम की हैकिंग से एकदम अलग है।

डेविड बेकर के अनुसार अमेरिका में 50 अलग अलग प्रांत और 10,000 चुनाव अधिकार क्षेत्र हैं, जबकि चुनाव करवाने की जिम्मेदारी शहरों व काउंटी की है। यही नहीं देश के विभिन्न इलाकों में अलग-अलग सिस्टम का उपयोग होता है।

अमेरिका के 80 प्रतिशत मतदाता इलेक्ट्रॉनिक बैलट के स्थान पर पेपर बैलट का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए अमेरिकी चुनाव सिस्टम को हैक करने के लिए साजिश में लाखों लोगों को शामिल करना होगा। हालांकि बेकर मानते हैं कि बहुत से वोटिंग मशीनों की तकनीक आधुनिक नहीं रह गई है और उन्हें बदला जा सकता है। 
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