व्हाइट हाउस ने कहा है कि अगर चीन के साथ उसका कारोबारी समझौता नहीं हो सका तो हो सकता है कि अमेरिका मौजूदा टैरिफ की दरों में 50 से 100 प्रतिशत इजाफा करके चीन पर दबाव बढ़ा दे। राष्ट्रपति कार्यालय में कार्यरत और अमेरिका की चाइना पॉलिसी के सलाहकार माइकल पिल्सबरी ने कहा कि अगर समझौते पर नहीं पहुंचा गया तो ट्रंप मौजूदा टैरिफ को बढ़ा सकते हैं जिससे यह ट्रेडवॉर और गहरी हो सकती है।
विश्व की यह दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इस वक्त ट्रेडवॉर में उलझी हुई हैं। इस मामले की शुरुआत तब हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते साल मार्च में चीन से आयात पर टैरिफ 25 फीसदी बढ़ा दिया। चीन, अमेरिका को सालाना 250 अरब डालर का सामान भेजता है। चीन ने भी इसका जस का तस जवाब देते हुये इतना ही टैरिफ अमेरिकी सामान पर लगा दिया। अमेरिका चीन को 110 अरब डालर का सामान निर्यात करता है।
उन्होंने हांगकांग के साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट को दिए साक्षात्कार में कहा कि दोनों पक्षों में 12 दौर की वार्ता हो चुकी है और कोई नतीजा नहीं निकल सका क्योंकि चीन, ट्रंप की कुछ मांगों को मानने में टालमटोल कर रहा है। अब एक बार फिर दोनों देश अक्टूबर महीने में वाशिंगटन में बातचीत करेंगे।
पिल्सबरी ने कहा अमेरिका 50 से 100 फीसदी टैरिफ तक बढ़ा सकता है। ट्रंप के आलोचकों का यह सोचना गलत निकला है कि राष्ट्रपति की संपूर्ण ट्रेडवॉर की बात केवल कह रहे हैं और इस पर अमल नहीं हो पाएगा। उन्होंने कहा कि इसके अलावा भी अमेरिका के कई तरीके हैं, मिसाल के तौर पर वित्तीय बाजार और आप जानते ही हैं कि राष्ट्रपति के पास विकल्प बहुत अधिक हैं। राष्ट्रपति यूएस-चीन ट्रेड को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते, वे यही चाहते हैं कि व्यापार के अंतर में सुधार किया जाए।