अमेरिका ने नेपाल सरकार से साफ कह दिया है कि अगर अमेरिकी एजेंसी मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (एमसीसी) से मदद लेने के बारे में हुए करार को उसने नहीं निभाया, तो इसका असर अमेरिका और नेपाल के रिश्तों पर पड़ेगा। एमसीसी से 50 करोड़ डॉलर की मदद लेने के लिए नेपाल सरकार सरकार ने 2017 में एक समझौता किया था, लेकिन घरेलू राजनीतिक विवाद के कारण आज तक इस समझौते के संसदीय अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी है।
नेपाली मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक, अमेरिका के उप विदश मंत्री डॉनल्ड लू ने नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा से फोन पर बातचीत की है। देउबा के अलावा उन्होंने सत्ताधारी गठबंधन में शामिल पार्टी नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओइस्ट सेंटर) के प्रमुख पुष्प कमल दहल और विपक्ष के नेता केपी शर्मा ओली से भी बात की है। पूर्व प्रधानमंत्री ओली कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के अध्यक्ष हैं। एमसीसी ने नेपाल को संसदीय अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 28 फरवरी तक की समयसीमा दे रखी है। उसने कहा है कि अगर तब ये प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, तो वह अपनी मदद की पेशकश वापस ले लेगी।
विश्लेषकों के मुताबिक यह पहला मौका है, जब सीधे अमेरिका सरकार ने इस मामले में हस्तक्षेप किया है। बताया जाता है कि डॉनल्ड लू ने नेपाली नेताओं से बातचीत के दौरान बेहद सख्त भाषा का इस्तेमाल किया। अखबार काठमांडू पोस्ट ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि 1947 में अमेरिका और नेपाल के बीच द्विपक्षीय संबंध कायम होने के बाद से अब तक अमेरिका ने ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं किया था।
देउबा और ओली के करीबी नेताओं ने मीडिया से बातचीत में इस बात की पुष्टि की है कि लू ने तीनों नेताओं को अलग-अलग फोन किया। इसके पहले एमसीसी की उपाध्यक्ष फातेमा जेड सुमर ने एक इंटरव्यू में कहा था कि एमसीसी ने वही समयसीमा तय की है, जिसका सुझाव प्रधानमंत्री देउबा और पुष्प कमल दहल ने दिया था। दोनों ने पिछले साल 29 सितंबर को एमसीसी के बोर्ड चेयरमैन और अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन को इस बारे में पत्र भेजा था।
यूएमएल के विदेश विभाग के प्रमुख राजन भट्टराई के मुताबिक लू ने ओली से बातचीत के दौरान ये साफ कहा कि अगर एमसीसी से हुए करार का अनुमोदन नहीं किया गया, तो अमेरिका नेपाल के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर हो जाएगा। भट्टराई के मुताबिक इसके जवाब में ओली ने कहा कि अमेरिका नेपाल का सबसे बड़ा विकास सहभागी रहा है। इसलिए नेपाल उसके साथ अपने संबंधों को नुकसान पहुंचाने के बारे में सोच भी नहीं सकता।
भट्टराई ने काठमांडू पोस्ट से कहा कि जहां तक हमारी पार्टी का सवाल है एमसीसी से मदद के मुद्दे पर वह अपने रुख पर कायम है। हम इंतजार कर रहे हैं कि इस मामले में सत्ताधारी गठबंधन क्या पहल करता है। जब सरकार का रुख सामने आ जाएगा, तब हम अपना रुख बताएंगे। सत्ताधारी गठबंधन में शामिल पुष्प कमल दहल और माधव कुमार नेपाल के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट पार्टियां इस करार का विरोध कर रही हैं। अब विश्लेषकों की नजर यह देखने पर है कि अमेरिका की धमकी के बाद उनके रुख में क्या बदलाव आता है।