अमेरिका के ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीयों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के सलाहकार आयोग ने ग्रीन कार्ड या स्थायी निवास से जुड़े सभी आवेदनों का निपटारा छह महीने के भीतर करने का प्रस्ताव दिया है। अगर व्हाइट हाउस, प्रेजिडेंट्स एडवाइजरी कमीशन ऑन एशियन अमेरिकन्स, नेटिव हवाईयन्स एंड पेसिफिक आईलैंडर (पीएसीएएएनएचपीआई) के सुझावों को स्वीकार कर लेता है तो ग्रीन कार्ड के लिए लंबे अरसे से इंतजार कर रहे सैकड़ों भारतीय-अमेरिकियों के लिए यह बड़ी खुशखबरी होगी।
पिछले हफ्ते वाशिंगटन में हुई थी बैठक
प्रेजिडेंट्स एडवाइजरी कमीशन ऑन एशियन अमेरिकन्स, नेटिव हवाईयन्स एंड पेसिफिक आईलैंडर (पीएसीएएएनएचपीआई) के सुझाव फिलहाल राष्ट्रपति के सुझावों के लिए व्हाइट हाउस भेजे गए हैं। पीएसीएएएनएचपीआई की बैठक के दौरान भारतीय-अमेरिकी समुदाय के नेता अजय जैन भूटोरिया ने इस संबंध में एक प्रस्ताव रखा था। उनके प्रस्ताव को सभी 25 आयुक्तों ने सर्वसम्मति से पारित किया था। ये बैठक पिछले हफ्ते वाशिंगटन में आयोजित की गई थी।
सलाहकार आयोग ने दिए हैं ये सुझाव
सलाहकार आयोग ने ग्रीन कार्ड के लंबित आवेदनों की संख्या घटाने के लिए यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) को अपनी प्रक्रियाओं, प्रणालियों और नीतियों की समीक्षा करने के साथ ही प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित कर इसे नई रूपरेखा देने, अनावश्यक प्रक्रिया को समाप्त करने और किसी भी अनुमोदन को स्वचालित बनाने तथा प्रणाली में सुधार लाने का प्रस्ताव दिया है।
आवेदन मिलने के छह महीने के भीतर निपटारा करना है उद्देश्य
सलाहकार आयोग के इन प्रस्तावों का मुख्य उद्देश्य परिवार आधारित ग्रीन कार्ड आवेदन डेफर्ड एक्शन फॉर चाइल्डहुड अराइवल (डीएसीए) नीति का नवीनीकरण, अन्य सभी ग्रीन कार्ड आवेदनों पर गौर करने की प्रक्रिया में लगने वाले समय को घटाने और आवेदन मिलने के छह महीने के भीतर उसका निपटारा करना है।
भारतीय-अमेरिकी समुदाय के नेता अजय जैन भूटोरिया द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2021 के लिए आवेदन किए गए 2,26,000 ग्रीन कार्ड में से परिवार आधारित केवल 65,452 ग्रीन कार्ड जारी किए गए थे। वहीं, अप्रैल 2022 में इस संबंध में 421,358 लोगों का साक्षात्कार लंबित था, जबकि मार्च में यह संख्या 436,700 थी।
भारतीयों को नई इमिग्रेशन प्रणाली को लेकर करना पड़ता है समस्याओं का सामना
दरअसल, अमेरिका की नई इमिग्रेशन प्रणाली से एच-1बी वर्क वीजा पर नौकरी करने के लिए वहां जाने वाले आइटी पेशेवर भारतीयों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अमेरिका ने इस प्रणाली के अंतर्गत सभी देशों के लिए सात प्रतिशत का कोटा तय कर दिया है। ऐसे में ग्रीन कार्ड पाने के लिए भारतीयों को बहुत इंतजार करना पड़ता है।