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चीन के लिए मल्टी-एंट्री वीजा रोकने पर अमेरिका में बिल पेश, चीनी हरकतें बंद करने तक कार्रवाई का प्रस्ताव

Sun, 28 Feb 2021 01:35 AM IST
देव कश्यप न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन
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अमेरिका और चीन का झंडा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : पीटीआई
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आर्थिक और औद्योगिक जासूसी को लेकर अमेरिका-चीन के रिश्ते पहले से खराब चल रहे हैं। हांगकांग, तिब्बत, ताइवान और उइगर मुस्लिमों को लेकर दोनों देशों में अभी भी तकरार है। इस बीच, प्रभावशाली अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटरों ने चीनी नागरिकों को मिलने वाले 10 वर्षीय मल्टी-एंट्री वीजा पर चीन की पहुंच खत्म करने संबंधी एक विधेयक सीनेट (उच्च सदन) में पेश किया है।

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सीनेट में पेश इस विधेयक में कहा गया है कि जब तक यह प्रमाणित नहीं हो जाए कि चीन ने अमेरिका के खिलाफ आर्थिक और औद्योगिक जासूसी को बंद कर दी है, तब तक इस वीजा पर रोक लगा देनी चाहिए। वीजा सुरक्षा अधिनियम नाम के इस विधेयक को सीनेटर मार्शा ब्लैकबर्न, टॉम कॉटन, रिक स्कॉट, टेड क्रूज और मार्को रुबियो ने पेश किया।

यदि यह बिल कानून में तब्दील होता है तो चीनी नागरिकों को 10 वर्ष के लिए दिए जाने वाले बी-1/ बी-2 वीजा पर रोक लग जाएगी। यह कानून तब तक प्रभावी रहेगा जब तक गृह मंत्रालय से यह प्रमाणित न हो जाए कि चीन ने अमेरिका के खिलाफ जासूसी अभियान बंद कर दिया है। इसके अलावा यह कानून ताइवान के खिलाफ उत्तेजक और जोर-जबरदस्ती वाला बर्ताव बंद न होने तक भी जारी रहेगा। इस बिल के जरिये चीन पर लगाम कसने की तैयारी की जा रही है।
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एक साल तक ही मिलेगी मल्टी-एंट्री सुविधा
बी-1/ बी-2 वीजा उन लोगों को जारी किया जाता है, जो अमेरिका में व्यापार या घूमने के मकसद से आते हैं। इस नए कानून के जरिये चीनी नागरिक केवल एक साल तक मल्टी-एंट्री वीजा का लाभ उठा पाएंगे। कानून के पास होने पर 2014 से पहले की वीजा स्थिति लागू हो जाएगी। हालांकि इसके नियम ताइवान-हांगकांग के कुछ लोगों पर लागू नहीं होंगे।  

विधेयक में ये प्रस्ताव भी शामिल
यह विधेयक चीन की बढ़ती आक्रामकता को लेकर पेश किया गया है। इसमें अमेरिकी गृहमंत्री द्वारा यह प्रमाणित करने का प्रस्ताव भी शामिल है कि चीन ने हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून वापस ले लिया है। साथ ही 1984 के चीन-ब्रिटिश संयुक्त घोषणा के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरी तरह से बरकरार रखा है। इसके अलावा उइगुर मुस्लिमों, तिब्बतियों और अन्य जातीय समूहों पर किए जाने वाले अत्याचारों को भी चीन ने खत्म कर दिया है। बीजिंग को दक्षिण चीन सागर में अपने गैरकानूनी दावों को करना बंद करना होगा और चीन में गलत तरीके से हिरासत में रखे गए विदेशी नागरिकों को रिहा करना होगा।

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भविष्य में मुस्लिम यात्रा प्रतिबंध रोकने के लिए भी विधेयक पेश

डेमोक्रेटिक पार्टी के 140 सांसदों ने भविष्य में मुसलमानों पर यात्रा प्रतिबंध न लगाने और धार्मिक आधार पर भेदभाव खत्म करने के लिए संसद में एक विधेयक दोबारा पेश किया है। सदन की न्यायिक समिति के प्रमुख जेरोल्ड नाडलर और जूडी चू ने राष्ट्रीय मूल-आधारित गैर प्रवासियों के लिए भेदभाव रोधी अधिनियम प्रतिनिधि सभा में पेश किया जबकि सीनेट में सीनेटर क्रिस कॉन्स ने इसे पेश किया।  

भारतीय-अमेरिकी सांसद एमी बेरा, रो खन्ना, प्रमिला जयपाल और राजा कृष्णमूर्ति विधेयक का समर्थन करने वालों में शामिल हैं। नाडलर ने कहा, जब ट्रंप प्रशासन ने विदेशों को नापसंद करने वाला मुस्लिम यात्रा प्रतिबंध जारी किया था तभी यह स्पष्ट हो गया था कि यह असंवैधानिक है, भेदभावकारी है तथा नैतिक रूप से निंदनीय है।

जूडी चू ने कहा कि मुसलमानों पर यात्रा प्रतिबंध लगाना अमेरिका पर एक घृणित धब्बा है। उन्होंने कहा कि यह कानून सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में कोई भी राष्ट्रपति लोगों को सिर्फ धर्म की वजह से प्रतिबंधित नहीं कर पाए। सीनेटर कॉन्स ने कहा, हमने यात्रा प्रतिबंध के दुखद पन्ने को पलट दिया है और अब नया अध्याय लिखना चाहिए।
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