आतंकवादी मसूद अजहर (फाइल फोटो)
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चीन ने जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में बचाकर साथी देशों का गुस्सा मोल ले लिया है। अमेरिका ने चीन को वर्चुअल तौर पर आतंक का समर्थक बताया है। अमेरिका का कहना है कि यदि चीन इसी तरह अड़ंगा लगाता रहा तो सदस्य देशों को दूसरे विकल्प पर ध्यान देना पड़ेगा।
चीन ने बुधवार को अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन के उस प्रस्ताव पर वीटो का इस्तेमाल किया था जिसमें अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने की मांग थी। सुरक्षा परिषद् के एक राजनयिक ने कहा कि चीन को संयुक्त राष्ट्र के पैनल को अपना काम करने से नहीं रोकना चाहिए था और चीन का यह कदम दक्षिण एशिया में आतंकवाद का मुकाबला करने और क्षेत्रीय स्थिरता को आगे बढ़ाने के उसके खुद के घोषित लक्ष्यों से असंगत था।
राजनयिक ने कहा, 'यदि चीन इन लक्ष्यों को लेकर गंभीर है तो उसे पाकिस्तान के आतंकी या किसी और देश के आतंकियों को नहीं बचाना चाहिए और उन्हें परिषद् के प्रति जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।' राजनयिक ने चेतावनी देते हुए कहा, यदि चीन इस तरह अजहर को नामित होने से रोकता रहेगा तो जिम्मेदार देशों को सुरक्षा परिषद् में अन्य कदम उठाने पड़ेंगे। इसे वहां तक नहीं पहुंचना चाहिए।
अपने बचाव में चीन का कहना है कि मसूद आजहर पर प्रतिबंध से पहले जांच के लिए समय चाहिए ताकि सभी पक्ष ज्यादा बातचीत कर सकें और एक अंतिम निर्णय पर पहुंचे जो सभी को स्वीकार्य हो। पिछले 10 सालों में चौथी बार चीन ने अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के रास्ते में रोड़े अटकाए हैं। जब इस बारे में पूछा गया तो चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा था कि चीन का फैसला समिति के नियमों के अनुसार है। उन्होंने कहा था कि चीन इस मुद्दे को ठीक से संभालने के लिए भारत सहित सभी पक्षों से संवाद और समन्वय के लिए तैयार है।
अमेरिका अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित न किए जाने को लेकर अपनी नाराजगी जता चुका है। अमेरिका और चीन के रिश्तों में भी तल्खी जारी है। अमेरिका के गृह मंत्रालय की रिपोर्ट का कहना है कि चीन में मानवाधिकारों का रिकॉर्ड स्तर पर उल्लंघन होता है। जबकि इस आरोप को चीन ने सिरे से खारिज कर दिया है। उसने अमेरिका पर पलटवार करते हुए उसे अपने मानवाधिकार रिकॉर्ड का ख्याल रखने की सलाह दी है। साथ ही कहा है कि उसे पहले अपने खुद के मामलों पर ध्यान देना चाहिए।