कोविड-19 (कोरोना वायरस) वैक्सीन की पहली खेप रविवार सुबह ट्रकों और जहाजों के जरिये रवाना होने के साथ ही अमेरिका में इस महामारी की रोकथाम के ऐतिहासिक प्रयास शुरू हो गए। प्रशासन ने शुरुआत में करीब 600 स्थानों पर वैक्सीन को भेजा है।
अमेरिका में रोजाना 2400 से ज्यादा लोगों को कोरोना महामारी का शिकार होकर जान गंवा रहे हैं। इस पर रोक लगाने के लिए ही अमेरिका ने ब्रिटिश कंपनी फाइजर और उसके जर्मन साझीदार बायोएनटेक एसई की संयुक्त साझीदारी में विकसित कोरोना वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दी है।
वैक्सीन की पहली डोज सोमवार को दी जाएगी। सबसे पहले देश में कोरोना वायरस महामारी से लोगों को बचाने में जूझ रहे स्वास्थ्य कर्मियों और बुजुर्ग लोगों को तीन सप्ताह के अंदर दो बार इस वैक्सीन की खुराक दी जाएगी।
मिशिगन स्थित फाइजर इंक फैक्टरी में मास्क पहने मजदूरों ने रविवार सुबह 6.30 बजे के बाद वैक्सीन की पहली खेप को शुष्क बर्फ के पैकेटों में पैक करना शुरू कर दिया था। कंपनी की कलामाजू फैसेलिटी से प्रशीतित वैक्सीन के बॉक्स सुबह 8.30 बजे ट्रकों में रखने शुरू कर दिए गए।
इन ट्रकों की सुरक्षा के लिए पिकअप ट्रक और एक एसयूवी में बॉडी आर्मर पहने सुरक्षा अधिकारी तैनात किए गए थे। इन बॉक्सों को कार्गो विमानों में लादा गया, जो इन्हें देश के विभिन्न हिस्सों में डिलीवरी देने के लिए उड़ान भर गए।
अमेरिकी अस्पताल सोमवार को वैक्सीन की पहली डोज बाजू में लगाने के लिए तैयारी कर रहे हैं, लेकिन अधिकतर अमेरिकियों के कोविड-19 वैक्सीन को डोज उपलब्ध होने में महीनों का समय लग सकता है।
फिर भी पहनना होगा मास्क, बनानी होगी सामाजिक दूरी
यूएस ऑपरेशन वार्प स्पीड चीफ एडवाइजर डॉ. मोंक्फ स्लॉयी ने फॉक्स न्यूज से कहा, अमेरिकी जनसंख्या के करीब 30 फीसदी या 10 करोड़ से ज्यादा लोग मार्च के अंत तक वैक्सीन के जरिये प्रतिरक्षित कर दिए जाएंगे।
उन्होंने कहा, तब भी देश इस वायरस के फैलाव को रोकने वाली हर्ड इम्युनिटी हासिल करने से खासा दूर होगा, इसलिए मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के प्रोटोकॉल का पालन अगले कई महीनों तक महामारी को अचानक विस्फोटक होने से रोकने के लिए करना होगा।
39 फीसदी अमेरिकी वैक्सीन की क्षमता को लेकर चिंतित
स्वास्थ्यकर्मियों को नई वैक्सीन को लेकर आम जनता में बनी हिचक से भी पार पाना होगा। अधिकतर अमेरिकियों का मानना है कि रिकॉर्ड गति से तैयार वैक्सीन उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा हो सकती है।
रायटर्स/आईपीएसओएस के पोल सर्वे के मुताबिक, 61 फीसदी अमेरिकी नागरिकों ने ही वैक्सीन लेने की हामी भरी है। बड़े पैमाने पर चिकित्सकीय परीक्षण में फाइजर की वैक्सीन ने बीमारी की रोकथाम में 95 फीसदी सफल रही थी, लेकिन यह अब तक सामने नहीं आया है कि क्या यह वैक्सीन की डोज ले चुके लोगों से दूसरे में संक्रमण फैलने से रोकती है या नहीं।