बहुप्रतीक्षित नोबेल शांति पुरस्कारों का एलान शुक्रवार को हुआ। यह पुरस्कार इस साल विश्व के सबसे अशांत क्षेत्र के नाम रहा, जिसके विजेता जेल में बंद बेलारूस के मानवाधिकार कार्यकर्ता एलेस बियालियात्स्की, रूसी मानवाधिकार संगठन 'मेमोरियल' और यूक्रेनी संगठन 'सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज' बने हैं।
मेमोरियल : सोवियत संघ के जमाने से साम्यवादी दमन पर नजर
नोबेल पुरस्कार दूसरा विजेता संगठन मेमोरियल सोवियत संघ के दौर में 1987 में बना था, जिसका कार्य साम्यवादी दमन के पीड़ितों की यादें सुनिश्चित रखना था। संघ के विघटन के बाद भी इसने रूस में मानवाधिकार के दमन की जानकारी जुटाना जारी रखा और राजनीतिक बंदियों के हाल पर भी नजर रखी।
सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीजः यूक्रेन को पूर्ण लोकतंत्र बनाने का किया काम
सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज की स्थापना यूक्रेन में 2007 के दौरान जारी उथल-पुथल के बीच मानवाधिकार और लोकतंत्र के लिए हुई थी। तब से संगठन यूक्रेनी नागरिक समाज को मजबूत करने और सरकार पर देश को पूर्ण लोकंतत्र बनाने के लिए दबाव बनाता रहा है। फरवरी में रूसी आक्रमण के बाद से यह यूक्रेनी नागरिकों पर रूसी सेना के अपराधों को दस्तावेजों में दर्ज कर रहा है।