भारत में शराब की खपत साल 2010 से 2017 के बीच सालाना 38 फीसदी तक बढ़ी है। यह मात्रा हर साल 4.3 से 5.9 लीटर प्रति व्यक्ति (वयस्क) रही है। वहीं इस अवधि में अमेरिका में शराब की खपत (9.3 से 9.8 लीटर) और चीन में (7.1 से 7.4 लीटर) के साथ कम वृद्धि हुई है। जबकि 1990 के बाद से विश्व स्तर पर शराब की खपत 70 फीसदी बढ़ी है। लांसेट जनरल में प्रकाशित हुए एक अध्ययन में ये दावा किया गया है।
आंकड़ों से पता चलता है कि 2010 से 2017 के बीच दक्षिण एशियाई देशों में शराब की खपत सबसे अधिक 34 फीसदी हुई है। जिसमें भारत, वियतनाम और म्यांमार सबसे आगे हैं। वहीं इस मामले में यूरोप की स्थिति काफी बेहतर हुई है।
यहां शराब की खपत इस दौरान 12 फीसदी तक कम हुई है। सबसे कम शराब पीने वाले देश अजरबैजान, किर्गिस्तान, यूक्रेन, बेलारूस और रूस हैं। वहीं अफ्रीका, अमेरिका और पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में शराब की खपत सामान्य रही है।
शराब से बहुत से नुकसान होते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार शराब पीने से कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। करीब 200 बीमारियां शराब पीने के कारण होती हैं। शराब के सेवन से कैंसर, टीबी और किडनी की बीमारी हो जाती है। आने वाले समय में ये खतरा और भी बढ़ने वाला है। इसके अलावा शराब के नशे के कारण कई हादसे भी हो जाते हैं। जिनमें लोग ना केवल घायल होते हैं, बल्कि कई लोगों की जान भी चली जाती है।