हक्कानी नेटवर्क एक खूंखार आतंकी सगंठन रहा है। इस आतंकी संगठन का नाम कई आतंकी हमलों में शामिल रहा है। जिन तीन बड़ी घटनाओं की वजह से ये सबसे ज्यादा सुर्खियों में आया, उनमें से दो घटनाएं भारतीय दूतावास पर बड़े आत्मघाती हमले से जुड़ी हैं।
अल-कायदा प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी की मौत के बाद एक बड़ा खुलासा हुआ है जिसने पाकिस्तान पर एक बार फिर से सवाल खड़ा कर दिया है। एक थिंक टैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से संबंध रखने वाले इस्लामिक आतंकवादी संगठन हक्कानी नेटवर्क अल-कायदा प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी की गतिविधियों में मददगार रहा था। काबुल में उसका रहना पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियों में मिलीभगत का स्पष्ट सबूत दे रहा है।
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पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के संरक्षण में रह रहा था अलजवाहिरी
रिपोर्ट के अनुसार जवाहिरी के फलने-फूलने में पाकिस्तानी संलिप्तता की संभावना एक विवादास्पद मुद्दे के रूप में उभरी है, भले ही न तो अमेरिका और न ही पाकिस्तान ने अब तक सार्वजनिक रूप से ऐसी भूमिका को स्वीकार किया हो। यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज (EFSAS) की रिपोर्ट के अनुसार, यह ध्यान देने योग्य है कि जवाहिरी के अफगानिस्तान पर तालिबान के अधिग्रहण तक पाकिस्तान में रहने की सूचना मिली थी। बताया जा रहा है कि अलजवाहिरी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के संरक्षण में रह रहा था।
अमेरिका ने 30 जुलाई की रात अयमान अल जवाहिरी को मार गिराया गया था
बता दें कि अमेरिका ने 30 जुलाई की रात आतंकवादी संगठन अल कायदा के सरगना अयमान अल जवाहिरी को मार गिराया गया था। अमेरिका ने काबुल में ड्रोन स्ट्राइक के जरिए इस खतरनाक मिशन को अंजाम दिया। अल-जवाहिरी की मौत की पुष्टि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने की थी। इस मिशन की सबसे खास बात यह है कि अमेरिका ने बिना किसी धमाके या किसी को नुकसान पहुंचाए बिना ही अल-जवाहिरी को मौत की नींद सुला दिया।