ईरान में हुए विमान हादसे को लेकर शंकाएं गहराती जा रही हैं। हादसे में 176 लोगों की मौत हुई है, लेकिन अभी तक दुर्घटना के पीछे स्पष्ट कारण को नहीं बताया गया है। अब एक मीडिया समूह ने दावा किया है कि यह विमान ईरान की खुद के मिसाइल हमले से ही गिरा है। यह शक इसलिए भी गहराता जा रहा है क्योंकि ईरान ने दुर्घटनाग्रस्त विमान का ब्लैक बॉक्स विमान निर्माता कंपनी और अमेरिकियों को देने से इनकार कर दिया है।
जॉर्डन की समाचार वेबसाइट 'अल हदत' के मुताबिक तेहरान में यूक्रेन का बोइंग 737 विमान ईरानी सेना की मिसाइल से दुर्घटनाग्रस्त हुआ है। माना जा रहा है कि सेना ने गलती से इस विमान को निशाना बनाया था।
हालांकि वेबसाइट ने इस संबंध में ज्यादा विस्तृत जानकारी नहीं दी है। न ही इस खबर के किसी सूत्र का खुलासा किया है। यह विमान यूक्रेन की इंटरनेशनल एयरलाइंस कंपनी का था, जिसके क्रैश होने में 167 यात्रियों और नौ क्रू सदस्यों की मौत हो गई।
अरबी भाषा में किए गए ट्वीट में कहा गया है कि ईरानी मिसाइल की वजह से विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ है। सोशल मीडिया पर कई वीडियो और तस्वीरों के हवाले से भी यह दावा किया जा रहा है कि विमान को गिराया गया है। एक वीडियो में दिखाया है कि विमान जमीन से टकराने से पहले ही आग के गोले में तब्दील हो चुका था। जबकि एक अन्य तस्वीर में विमान का मलबा दिखाया गया है, जिसमें गोलियां जैसे निशान बने हुए हैं।
यूक्रेन में ईरानी दूतावास ने भी पहले किसी तरह के आतंकी या मिसाइल हमले की आशंकाओं को खारिज किया था। मगर बाद में अपने बयान में बदलाव करते हुए उसन कहा है कि आयोग इस मामले की जांच कर रहा है। आयोग की जांच से पहले किसी भी तरह की टिप्पणी को गैर आधिकारिक माना जाएगा।
ब्लैक बॉक्स देने से इनकार
मेहर समाचार एजेंसी के अनुसार ईरान के नागरिक उड्डयन संगठन के प्रमुख अली अबेदजादेह ने कहा, 'हम विमान निर्माता (बोइंग) और अमेरिकियों को ब्लैक बॉक्स नहीं देंगे। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि जांच के लिए इसे किस देश में भेजा जाएगा।'
ईरान के मुताबिक उसे विमान के दोनों ब्लैक बॉक्स मिले हैं। अबेदजादेह ने कहा कि वैश्विक नियमों के मुताबिक जिस देश में दुर्घटना होती है, उसे ही जांच करने का अधिकार होता है।
उन्होंने कहा कि इस दुर्घटना की जांच ईरान उड्डयन संगठन के द्वारा की जाएगी लेकिन जांच के दौरान यूक्रेन के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
हालांकि विशेषज्ञों के मुताबिक ब्लैक बॉक्स की जांच करने की व्यवस्था कुछ ही देशों के पास है। इनमें ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और अमेरिका शामिल है। फ्रांस के एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो का कहना है कि उनसे अभी किसी तरह की मदद नहीं मांगी गई है।