क्या आपने महसूस किया कि नई पीढ़ी के युवा और खासतौर से किशोर आसानी से और ज्यादा संख्या में निराश होते जा रहे हैं, रिश्तों को बनाए रखने में दिक्कतें पेश आ रही हैं, या वे स्वयं को उपेक्षित अथवा ज्यादा आक्रामक पा रहे हैं? ऐसा वायु प्रदूषण की वजह से भी हो सकता है। स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा अमेरिकी साइकोसोमैटिक सोसाइटी के जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में दावा किया गया है।
इसके अनुसार प्रदूषण का असर केवल स्वास्थ्य पर ही नहीं हो रहा बल्कि यह किशोरों में चिंताजनक मानसिक स्थितियां पैदा का रहा है। अध्ययनकर्ता जोनस जी मिलर के अनुसार पहले से तनाव से गुजर रहे किशोरों को प्रदूषण स्थितियां और बिगाड़ रहा है। अध्ययन के दौरान किशोरों को शारीरिक व मानसिक परीक्षण से गुजारा गया, उनके हृदय की गति और त्वचा की इलेक्ट्रोडर्मल गतिविधि को मापा गया। उनके रहन-सहन और स्वभाव को लेकर कई प्रश्न भी किए गए। जिन जगहों पर वे रह रहे हैं, वहां के पीएम 2.5 प्रदूषक तत्व के स्तर का रिकॉर्ड अध्ययन में शामिल किया गया।
- वे जगहें जहां पीएम 2.5 का स्तर अधिक है, इनमें रह रहे किशोरों में नकारात्मक मानसिक स्थितियां अधिक मिली।