मार्च 2006 में यूरोपीय यूनियन ने बार-बार सुरक्षा मानकों की अवहेलना करने पर एयर कोरियो के सभी विमानों के यूरोप में उड़ान पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन, चार साल बाद इस एयरलाइन ने रूसी टूपोलेव 204 विमान खरीदकर यूरोप में फिर से अपनी सेवाएं शुरू कर दी।
यह एयरलाइन प्योंगयांग से बीजिंग, शंघाई, डालियान, कुआलालंपुर और कुवैत सिटी सहित 23 स्थानों के लिए सेवा प्रदान करती है।
जानकारों के अनुसार, इस एयरलाइन की सेवाओं में पहले से ज्यादा सुधार हुआ है क्योंकि अपने शुरुआती दिनों में इसकी सेवा और खराब थी। पुराने सोवियतकालीन विमानों के इंजन से निकलने वाला शोर यात्रियों को बेचैन कर देता था। उन विमानों में आपातकालीन बचाव के लिए व्यवस्थाओं का भी अभाव था।
विशेषज्ञों ने अनुमान जताया है कि उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन आने वाले समय में अलग-अलग राष्ट्रों से संबंधों को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर एयरलाइन में निवेश करने के लिए तैयार हो सकते हैं।
अनुमान है कि एयर कोरियो के विमानों की संख्या बढ़ने पर उत्तर कोरिया में विदेशी यात्रियों का आगमन ज्यादा होगा। यह देश पहले से ही कई प्रकार की पाबंदियों से जूझ रहा है। इसके अलावा यहां विश्व की सबसे मजबूत सेंसरशिप लागू है। इसलिए, विदेशी लोगों को इस देश के बारे में जानने की उत्सुकता भी ज्यादा है।
लोग यहां के नेता किम जोंग उन और यहां के लोगों के जीवन को नजदीक से देखना चाहते हैं। उत्तर कोरिया भी अमेरिका के साथ बातचीत की मेज पर आकर सभी विवादों का समाधान करना चाहता है। इसलिए दो बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ किम जोंग की बातचीत हो चुकी है। ये दोनों नेता अब तीसरी बार मुलाकात करने की तैयारी कर रहे हैं।