अहमदाबाद विमान हादसे में पीड़ितों का प्रतिनिधित्व कर रहे अमेरिकी वकील माइक एंड्रयूज ने शुरुआती मुआवजा अपर्याप्त बताया और बोइंग विमान के निर्माण में तकनीकी खामी की आशंका जताई। उन्होंने कहा कि उनकी टीम विशेषज्ञों के साथ मिलकर दस्तावेजों की समीक्षा कर रही है और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की लड़ाई जारी रहेगी।
अहमदाबाद विमान हादसे में पीड़ितों के परिवारों का प्रतिनिधित्व कर रहे अमेरिकी वकील माइक एंड्रयूज ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि एअर इंडिया की उड़ान एआई-171 से जुड़े इस हादसे के लिए अब तक दिया गया शुरुआती मुआवजा पर्याप्त नहीं है। एंड्रयूज ने यह भी आशंका जताई कि बोइंग विमान के निर्माण में तकनीकी खामियां हो सकती हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
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एंड्रयूज ने बताया कि उनकी लॉ फर्म इस समय लगभग 110 पीड़ितों के परिवारों का प्रतिनिधित्व कर रही है। इनमें विमान के यात्री और जमीन पर मारे गए लोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआती मुआवजा केवल औपचारिकता है, जबकि पीड़ित परिवारों का नुकसान कहीं अधिक है।
विशेषज्ञों की मदद से जांच
वकील ने कहा कि उनकी टीम विशेषज्ञों के साथ मिलकर दस्तावेजों की समीक्षा कर रही है। उनका लक्ष्य यह पता लगाना है कि हादसे की असल वजह क्या रही। एंड्रयूज का कहना है कि वे उन लोगों से भी बातचीत कर रहे हैं, जिनके पास जांच से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी हो सकती है।
एएआईबी की रिपोर्ट पर सवाल
भारतीय विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने 12 जून को दुर्घटना की प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की थी। लेकिन एंड्रयूज ने आरोप लगाया कि इस रिपोर्ट ने उत्तरों से ज्यादा सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में कई बिंदु स्पष्ट नहीं किए गए और जांच की गति बोइंग से जुड़े पुराने मामलों जैसी ही दिख रही है।
पानी लीक से शॉर्ट सर्किट की आशंका
इससे पहले एंड्रयूज ने दावा किया था कि विमान में पानी लीक होने से शॉर्ट सर्किट हुआ, जो हादसे की वजह बन सकता है। इस दुर्घटना में कुल 260 लोगों की जान गई थी। उनके मुताबिक, बोइंग के निर्माण से जुड़ी खामियों को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता और कंपनी की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
मुआवजे और जवाबदेही पर जोर
एंड्रयूज ने कहा कि उनकी प्राथमिकता पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाना और सही मुआवजा दिलाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल आर्थिक नुकसान की भरपाई का मामला नहीं है, बल्कि उन तकनीकी कमियों को उजागर करना भी जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियां न हों।