पाकिस्तान के पंजाब में अहमदिया समुदाय के एक व्यक्ति को आशूरा पर लोगों को बिरयानी और सॉफ्ट ड्रिंक बांटने पर ईशनिंदा के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उन पर मुस्लिम रीति-रिवाज अपनाने का आरोप लगाते हुए पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 298(सी) के तहत केस दर्ज किया। अहमदिया समुदाय ने इसे मानवता का कार्य बताया और पुलिस की कार्रवाई की निंदा की।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में अल्पसंख्यक अहमदिया समुदाय के एक व्यक्ति को ईशनिंदा के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, यह व्यक्ति मुहर्रम की 10वीं तारीख यानी आशूरा के दिन रावलपिंडी के गुलशनाबाद इलाके में लोगों को बिरयानी और सॉफ्ट ड्रिंक बांट रहा था। आरोप है कि उसने खुद को मुसलमान बताकर यह काम किया।
विज्ञापन
पुलिस ने बताया कि आरोपी को सात दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। अहमदिया समुदाय के प्रवक्ता आमिर महमूद ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा, क्या इंसानियत के नाते अपने हमवतन को खाना-पानी देना भी अब अपराध है? उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में बढ़ती कट्टरता के कारण वह दिन दूर नहीं, जब किसी को किसी और को एक गिलास पानी देना भी मना हो जाएगा।
पंजाब पुलिस ने फैजान अहमद नाम के इस व्यक्ति पर पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 298 (सी) के तहत मामला दर्ज किया है। यह धारा अहमदियों को खुद को मुसलमान कहने या इस्लामी तौर-तरीकों का पालन करने से रोकती है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, फैजान ने 'इस्लामी रस्में निभाईं', इसलिए उस पर ईशनिंदा का मामला दर्ज किया गया और उसे गिरफ्तार किया गया।
हालांकि, अहमदिया समुदाय खुद को मुसलमान मानता है, लेकिन पाकिस्तान की संसद ने 1974 में उन्हें गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया था। इसके दस साल बाद न सिर्फ उन्हें मुसलमान कहलाने से रोका गया, बल्कि इस्लामी प्रतीकों और रीति-रिवाजों का पालन करने पर भी पाबंदी लगा दी गई। इनमें मस्जिदों पर गुम्बद या मीनार बनाना, सार्वजनिक रूप से कुरान की आयतें लिखना या दिखाना भी शामिल है।