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Sri Lanka Crisis: श्रीलंका में अब जब्त होगी आंदोलनकारियों की संपत्ति! सख्त कार्रवाई की तैयारी में सरकार

Sun, 21 Aug 2022 04:41 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, कोलंबो

सार

अरागलया से जुड़े आंदोलनकारी तत्कालीन राष्ट्रपति गोटबया राजपक्षे के इस्तीफे की मांग पर जोर डालने के लिए गॉल फेस पर 125 दिन तक जमे रहे। तब उन्होंने इस जगह का नाम गोटा गो गामा (गोटबया घर वापस जाओ) रखा था। 10 अगस्त को आंदोनकारी इस जगह को खाली करके चले गए। उसके ठीक पहले कई आंदोलनकारी कार्यकर्ता प्रतिरोध स्थल को बनाए रखने की गुजारिश लेकर सुप्रीम कोर्ट गए थे।
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sri lanka crisis - फोटो : ANI
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विस्तार
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श्रीलंका में चार महीने से अधिक समय तक चले अरागलया (सरकार विरोधी संघर्ष) में सक्रिय रहे कार्यकर्ताओं के खिलाफ अब और भी सख्त कार्रवाई हो सकती है। अब तक कई आंदोलनकारी नेता गिरफ्तार किए जा चुके हैँ। इसी बीच अब शहरी विकास और आवास मंत्री प्रसन्ना रणातुंगा के एक बयान ने आंदोलन में सक्रिय रहे कार्यकर्ताओं की चिंता और बढ़ा दी है। रणातुंगा ने कहा है कि कोलंबो में प्रमुख प्रतिरोध स्थल गॉल फेस को आंदोलन के कारण जो क्षति पहुंची, उसकी कीमत की वसूली आंदोनकारियों से की जाएगी।

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गॉल फेस इलाका राष्ट्रपति आवास के ठीक सामने मौजूद है। इसे ग्रीन एरिया का दर्जा मिला हुआ है। रणातुंगा ने कहा कि यह सार्वजनिक संपत्ति है। शहरी विकास प्राधिकरण ने इस क्षेत्र के विकास में काफी धन लगाया है। रणातुंगा ने कहा है कि जिन कार्यकर्ताओं ने गॉल फेस में प्रतिरोध स्थल बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी थी, उन्हें इस क्षेत्र के पहुंचे नुकसान के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा।

अरागलया से जुड़े आंदोलनकारी तत्कालीन राष्ट्रपति गोटबया राजपक्षे के इस्तीफे की मांग पर जोर डालने के लिए गॉल फेस पर 125 दिन तक जमे रहे। तब उन्होंने इस जगह का नाम गोटा गो गामा (गोटबया घर वापस जाओ) रखा था। 10 अगस्त को आंदोनकारी इस जगह को खाली करके चले गए। उसके ठीक पहले कई आंदोलनकारी कार्यकर्ता प्रतिरोध स्थल को बनाए रखने की गुजारिश लेकर सुप्रीम कोर्ट गए थे।
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समझा जाता है कि राजपक्षे के इस्तीफे के बाद आंदोलन के लिए जन समर्थन में आई गिरावट की वजह से अरागलया नेतृत्व ने प्रतिरोध खत्म करने का फैसला किया। उसके पहले 20 जुलाई को रानिल विक्रमसिंघे को श्रीलंका की संसद ने नया राष्ट्रपति चुना था। आरोप है कि पद संभालने के फौरन बाद विक्रमसिंघे ने सरकारी विरोधी आंदोलनकारियों के दमन की नीति अपना ली। इस महीने के आरंभ से इस नीति को और सख्ती से लागू किया गया है। अब आंदोलनकारियों की संपत्ति जब्त करने का साफ संकेत सरकार ने दिया है। रणातुंगा ने कहा कि संपत्ति के नुकसान के अंदाजा लगाया जाएगा और उसके बाद कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। मुकदमे में क्षति के लिए जिम्मेदार लोगों की तलाश की अर्जी शामिल होगी। हम दलील रखेंगे कि अरागलया ही नुकसान के लिए जिम्मेदार है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सरकार की इस धमकी से आंदोलनकारी नेता डरे हुए हैं। उनमें से कुछ ने कहा है कि आंदोलन में शामिल होने के कारण उनकी नौकरी चली गई है और ऊपर से अब उनसे क्षति की भरपाई करने को भी कहा जा रहा है। आंदोलन के एक प्रमुख नेता ने वेबसाइट इकॉनमीनेक्स्ट.कॉम से कहा कि मैंने जो भी किया, वह अपने देश, खुद अपने, अपने परिवार और उन लोगों के लिए किया, जो नाखुश थे। अब मेरी जिंदगी खतरे में है। मैंने अपने भेष बदल लिया है। मेरी नौकरी भी जा चुकी है। जो कुछ बचत मेरे पास थी, अभी उससे ही गुजारा चला रहा हूं। मेरी बचत भी देश के विदेशी मुद्रा भंडार की तरह ही तेजी से खत्म होती जा रही है। 

एक अन्य आंदोलनकारी नेता ने इसी वेबसाइट से कहा कि ये सरकार लगातार हमारा यकीन तोड़ रही है। मेरे पास खाने को पैसे नहीं हैं, और अब मुझसे ये निक्कमे लोग  अपेक्षा कर रहे हैं कि मैं अपने देश से प्यार करने की कीमत चुकाऊं।

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