अमेरिका से चीन की जुबानी जंग तेज होने के बीच खबर है कि चीन ने परदे के पीछे तनाव घटाने की कूटनीति शुरू कर दी है। बताया जाता है कि शी ने उप राष्ट्रपति वांग चिशान को इस काम में लगाया है। वांग लंबे समय तक चीन में वित्त और वाणिज्य मामलों के प्रभारी रह चुके हैं। इस नाते वॉल स्ट्रीट (अमेरिकी पूंजीपतियों) के साथ उनका बेहतर तालमेल है।
यून के शपथ ग्रहण समारोह में आए अमेरिकी दल का नेतृव डगलस एम्हॉफ कर रहे थे। एम्हॉफ अमेरिकी उप राष्ट्रपति कमला हैरिस के पति हैं। साथ ही इस दल में अमेरिका श्रम मंत्री मार्टिन वॉल्श और कई सांसद एवं उच्च अधिकारी शामिल थे। सूत्रों ने निक्कई एशिया को बताया है कि इस यात्रा के दौरान वांग ने अमेरिकी दल को एक खास संदेश दिया। इसमें कहा गया कि चीन निकट भविष्य में अमेरिका के साथ उच्चस्तरीय वार्ता के लिए तैयार है। इसका अर्थ यह निकाला गया है कि अब शी जिनपिंग निजी रूप से राष्ट्रपति बाइडन से मिलने के लिए राजी हो गए हैं।
बताया जाता है कि सिओल में दिए गए संदेश का ही यह नतीजा था कि हफ्ते भर बाद चीन के सर्वोच्च राजनयिक यांग जिशी की अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवान से फोन पर बातचीत हुई। दोनों के बीच ताइवान मसले के अलावा यूक्रेन युद्ध, कोरिया प्रायद्वीप में तनाव, और अन्य अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मसलों पर भी चर्चा हुई। कूटनीतिज्ञों के मुताबिक चीन अब यह संदेश देने की कोशिश में है कि अगर अमेरिका ताइवान मामले पर ज्यादा जोर देने से बचे, तो वह अमेरिका के साथ यूक्रेन और उत्तर कोरिया के मुद्दों पर सहयोग करने को तैयार है।
चीन और अमेरिका में बन रही बात का एक और संकेत बीते रविवार को सुलिवान ने दिया। उन्होंने घोषणा की कि नए इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क में ताइवान शामिल नहीं होगा। बताया जाता है कि इसके जरिए अमेरिका ने चीन को अपनी तरफ से सद्भावना का संदेश भेजा है।
सूत्रों के मुताबिक चीन ने अमेरिका से यह अपील भी की है कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जमाने में चीनी वस्तुओं पर अमेरिका में लगाए गए अतिरिक्त आयात शुल्क को हटा लिया जाए। इस बारे में भी अमेरिका ने सकारात्मक संकेत दिया है। समझा जाता है कि दोनों देश तनाव को एक सीमा से बाहर ना जाने देने की जरूरत महसूस कर रहे हैं। इसलिए यह संभव है कि जल्द ही बाइडन-शी वार्ता का कार्यक्रम घोषित हो।