बलूचिस्तान प्रांत में हुए भयानक दहशतगर्द हमले ने देश को हिला कर रख दिया है। इस हमले ने इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सरकार की शासन क्षमता पर नए सिरे से गंभीर सवाल उठा दिए हैं। सरकार पर आंतकवाद के खिलाफ प्रभावी रणनीति अपनाने में नाकाम रहने के इल्जाम लग रहे हैं। इस हमले की खबर उसी रोज आई जिस दिन पाकिस्तान के गृह मंत्री ने चेतावनी दी कि देश में अगले दो महीनों में आतंकवादी गतिविधियां बढ़ सकती हैं। उधर इमरान खान सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि अभी भी अफगानिस्तान की जमीन का पाकिस्तान के खिलाफ इस्तेमाल हो रहा है।
बलूचिस्तान प्रांत के केच जिले में आतंकवादियों की तरफ से गोलीबारी में पाकिस्तान के दस सैनिक मारे गए। सेना ने दावा किया है कि उसकी तरफ से की गई जवाबी गोलीबारी में एक दहशतगर्द मारा गया। सेना ने कहा है कि हमले के बाद उस इलाके में सेना की तरफ से छेड़े गए खोजबीन अभियान में तीन आतंकवादी पकड़े गए हैं।
आतंकवाद से निपटने के सवाल पर सरकार में मौजूद भ्रम का इजहार गृह मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के ताजा बयानों से भी हुआ है। ब्रिटिश मीडिया को दिए इंटरव्यू में गृह मंत्री अहमद ने अफगान तालिबान की ‘सकारात्मक भूमिका’ की तारीफ की। उन्होंने कहा कि अफगान तालिबान ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से अपनी गतिविधियां रोकने को कहा है। जबकि पाकिस्तान की संसद नेशनल असेंबली की एक स्थायी समिति के सामने दिए अपने बयान में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद युसूफ ने दो टूक कहा कि अभी भी अफगानिस्तान की जमीन से पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को संचालित किया जा रहा है।