पाल में सत्ताधारी गठबंधन के भविष्य पर कयास तेज हो गए हैं। सबसे अधिक चर्चित प्रश्न यह है कि क्या पांच दलों का यह गठबंधन अब एकजुट रहते हुए अगले चुनाव में उतरेगा? स्थानीय चुनावों को अगले 18 मई को कराने पर प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के राजी हो जाने के बाद अब सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दोनों पार्टियों के रुख को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। पुष्प कमल दहल के नेतृत्व वाली नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओइस्ट सेंटर) और माधव कुमार नेपाल के नेतृत्व वाली नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूनिफाइड सोशलिस्ट) स्थानीय चुनावों को संसदीय चुनाव के बाद कराने पर जोर डाले हुई थीं।
दहल और नेपाल की पार्टियां इस मदद का विरोध कर रही हैं। इसके बावजूद अगर प्रधानमंत्री देउबा ने एमसीसी की मदद की स्वीकार की, तो माना जा रहा है कि उसके सत्ताधारी गठबंधन का एकजुट बने रहना कठिन हो जाएगा। दो अहम मुद्दों पर अपनी अनदेखी के बाद दहल और नेपाल के लिए यह मुमकिन नहीं रह जाएगा कि अपनी पार्टियों को नेपाली कांग्रेस के साथ गठबंधन में बनाए रखें।
उधर कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि प्रधानमंत्री देउबा भी गठबंधन के एकजुट चुनाव लड़ने को लेकर बहुत उत्साहित नहीं हैं। वे सिर्फ यह चाहते हैं कि गठबंधन किसी तरह अगले संसदीय चुनाव तक बना रहे। जबकि जानकारों का मानना है कि एमसीसी की सहायता के सवाल गठबंधन में संसदीय चुनाव से पहले ही फूट पड़ जाने की वास्तविक संभावना है। खासकर अगर देउबा ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली विपक्षी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) की मदद से इस मुद्दे पर संसद में अनुमोदन प्रस्ताव पारित कराया, तो गठबंधन के कायम रहने की गुंजाइश काफी कम हो जाएगी।
नेपाली कांग्रेस में देउबा विरोधी धड़ा पहले से ही इस राय का है कि पार्टी को संसदीय चुनाव अकेले लड़ना चाहिए। इस धड़े के नेता शेखर कोइराला हैं। उन्होंने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘मैं किसी गठबंधन सहयोगी के साथ मिल कर चुनाव लड़ने के खिलाफ हूं। स्थानीय चुनावों में तो ऐसा करना असंभव है।’ बताया जाता है कि पार्टी महासचिव गगन थापा भी यही चाहते हैं कि नेपाली कांग्रेस अकेले चुनाव लड़े।