पीएम नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात पर चीनी विश्लेषकों ने कहा कि इसका अपना रणनीतिक महत्व है। चीन-भारत संबंधों की बहाली न केवल दोनों देशों के हितों की पूर्ति करती है बल्कि विश्व व्यवस्था के लिए बहुध्रुवीकरण में भी सहायक है।
फुडान विश्वविद्यालय में दक्षिण एशियाई अध्ययन केंद्र के उप निदेशक लिन मिनवांग ने ग्लोबल टाइम्स से कहा कि इससे पता चलता है कि चीन-भारत संबंध अब सुधार की राह पर हैं। दोनों पक्ष सीमा क्षेत्र से संबंधित मुद्दों पर समाधान पर पहुंच गए हैं, इसलिए द्विपक्षीय संबंधों की बहाली में बाधा डालने वाली रुकावट दूर हो गई है। वहीं चीन विदेश मामलों के विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ली हैडोंग ने कहा कि बैठक साबित करती है कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं की ओर से गठित यह अंतरराष्ट्रीय संगठन प्रमुख देशों के लिए कूटनीति के साथ संवेदनशील मुद्दों पर एक-दूसरे के साथ समन्वय करने, क्षतिग्रस्त संबंधों को ठीक करने और आम सहमति तक पहुंचने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच और चैनल है।
बहुध्रुवीय जगत में भारत और चीन अहम खिलाड़ी
चीन विदेश मामलों के विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ली हैडोंग ने कहा कि दुनिया बहुध्रुवीकरण के दौर में प्रवेश कर रही है और चीन तथा भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाएं इस प्रक्रिया में अहम खिलाड़ी हैं। इसलिए यदि वे मतभेदों को ठीक से प्रबंधित कर सकते हैं तथा आपसी विश्वास और एकता को बढ़ावा दे सकते हैं तो वे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को सुधारने या सुधारने के लिए महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं, जो पश्चिमी-प्रभुत्व वाले एकतरफावाद और अमेरिकी आधिपत्य के प्रभाव का सामना कर रही है।
दोनों देशों को मिलकर करना होगा काम : शी
पीएम मोदी के साथ बैठक में जिनपिंग कहा कि भारत और चीन को अपने संबंधों को सामान्य बनाए रखने के लिए एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास अब चीन व भारत का सबसे बड़ा साझा लक्ष्य है। दोनों एक-दूसरे के लिए खतरा नहीं बल्कि विकास का अवसर हैं, तथा प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि सहयोगी साझेदार हैं। चीनी सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, पीएम मोदी और जिनपिंग इस बात पर सहमत थे कि चीन-भारत के रिश्तों को नई रणनीतिक ऊंचाई पर ले जाया जाए व भौगोलिक और वैश्विक शांति बनाए रखने में सहयोग करेंगे।
पीएम मोदी के साथ बैठक में जिनपिंग कहा कि भारत और चीन को अपने संबंधों को सामान्य बनाए रखने के लिए एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास अब चीन व भारत का सबसे बड़ा साझा लक्ष्य है। दोनों एक-दूसरे के लिए खतरा नहीं बल्कि विकास का अवसर हैं, तथा प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि सहयोगी साझेदार हैं। चीनी सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, पीएम मोदी और जिनपिंग इस बात पर सहमत थे कि चीन-भारत के रिश्तों को नई रणनीतिक ऊंचाई पर ले जाया जाए व भौगोलिक और वैश्विक शांति बनाए रखने में सहयोग करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी-जिनपिंग की बैठक का होगा व्यापक असर: कंवल सिब्बल
पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक का व्यापक असर होगा। दोनों देशों के बीच जारी तनाव के बीच आपसी संबंधों को सामान्य बनाने के लिए यह पहला और महत्वपूर्ण कदम है।
दोनों देश आपसी सभी मतभेदों को दूर कर लेंगे, यह मानना गलत होगा। दोनों देशों के लिए यह बेहतर होगा कि जहां तक संभव हो सके, वे सीमा पर शांति बनाए रखे और किसी दुस्साहस से बचें। दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य करने का पहला कदम विवादित इलाकों से सेनाओं का हटाना है। सिब्बल ने कहा कि हम एक लोकतांत्रिक देश हैं व पीएम मोदी लोकतांत्रिक रूप से चुने हुए पीएम हैं न कि तानाशाह। जबकि शी एक ऐसे देश के राष्ट्रपति हैं जो हमारी तरह खुला और लोकतांत्रिक नहीं है। यदि शी का मन बदलता है और पीएलए सीमाओं से पीछे हटने को तैयार हो जाती है तो संबंध बेहतर हो सकते हैं। पहले भी नेता आपस में बैठक करते रहे हैं लेकिन अगर इस बार शी कोई सकारात्मक पहल करते हैं तो रिश्तों के लिए बेहतर होगा। उन्होंने कहा, पीएम मोदी ने अगले साल चीन में शंघाई सहयोग संगठन को समर्थन देने की बात कही है। इसका तात्पर्य है कि पीएम अगले साल बीजिंग जा सकते हैं।
पीएम मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकात पर विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
पीएम नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक पर यूनाइटेड किंगडम के हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य रमिंदर रेंजर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच शांति की जरूरत है। दोनों नेताओं की मुलाकात एक बहुत ही महत्वपूर्ण विकास है। उन्होंने कहा कि एक समय था जब हम हिंदी-चीनी भाई-भाई के बारे में बात करते थे, लेकिन दुर्भाग्य से 1962 में, चीन ने भारत पर आक्रमण किया, इसे दोहराया नहीं जाना चाहिए।
दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध होना आवश्यक: जयंत प्रसाद
भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए, पूर्व भारतीय राजनयिक जयंत प्रसाद ने कहा है कि दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध होना आवश्यक है, खासकर जब वे दोनों 2050 तक विश्व के नंबर एक और दो देश बनने की दिशा में बढ़ रहे हैं। उनका मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच संबंध अच्छे नहीं होते हैं, तो दोनों देशों को नुकसान होगा और वे अपने विकास लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर पाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि आतंकवादियों को चिह्नित करने के मामले में चीन उतना आगे नहीं आया है, जितना भारत चाहता है।
भारत-चीन के बीच शांति ब्रिक्स के साथ पूरे विश्व के लिए महत्वपूर्ण: गौतम बंबावले
चीन में भारत के पूर्व राजदूत गौतम बंबावले ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक कजान में हुई बैठक पिछले 5 वर्षों में दोनों नेताओं की पहली द्विपक्षीय बैठक है। पिछली बैठक 2019 में हुई थी। दोनों देशों के बीच पूर्वी लद्दाख में सीमा तनाव के कारण दोनों नेताओं की बैठक नहीं हो पाई थी, लेकिन हाल ही में हुए समझौते के बाद कुछ तनाव कम हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत और चीन जनसंख्या और अर्थव्यवस्था के मामले में ब्रिक्स में सबसे बड़े देश हैं। भारत और चीन के बीच शांति न केवल ब्रिक्स के लिए, बल्कि पूरे विश्व के लिए महत्वपूर्ण है। हमें उम्मीद है कि पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ हुए समझौते के बाद हम आगे बढ़ सकते हैं और भारत-चीन की सीमा पर शांति स्थापित हो सकती है।
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