अरब सरकार के प्रतिनिधियों ने रविवार को काहिरा में वोटिंग करके 12 साल के बाद सीरिया को अरब लीग में वापस लाने का फैसला किया। मिस्र की राजधानी में वोटिंग ऐसे समय में हुई है जब कुछ दिन पहले क्षेत्रीय शीर्ष राजनयिकों ने जॉर्डन में सीरिया को अरब लीग में वापस लाने के रोडमैप पर चर्चा की थी। सऊदी अरब 19 मई को आगामी अरब लीग शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। संगठन ने यह जानकारी दी है।
संगठन में सीरिया की सदस्यता 12 साल पहले विद्रोह के संघर्ष में बदलने के बाद निलंबित कर दी गई थी। मार्च 2011 से संघर्ष में करीब पांच लाख लोग मारे जा चुके हैं और युद्ध से पहले की देश की 23 मिलियन आबादी का आधा हिस्सा विस्थापित किया जा चुका है।
वोटिंग में भाग लेने वाले 22 सदस्य देशों में से सभी 13 ने फैसले का समर्थन किया। अरब लीग आम तौर पर आम सहमति से समझौतों तक पहुंचने की कोशिश करता है लेकिन कभी-कभी आसान बहुमत का विकल्प चुनता है।
हालांकि, दमिश्क के साथ संबंधों को सामान्य करने को लेकर सभी अरब देशों में सहमति नहीं है। वोटिंग में कई देशों की सरकारें शामिल नहीं हुईं। इसमें कतर भी शामिल नहीं हुआ, जो सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार के खिलाफ विपक्षी समूहों को समर्थन देता है। कतर, दमिश्क के साथ संबंधों को सामान्य करने का विरोध करना जारी रखा हुआ है।
सीरिया की वापसी का फैसला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2254 के अनुरूप संकट के राजनीतिक समाधान तक पहुंचने के लिए अरब सरकारों के साथ जारी संवाद के तहत भी लिया गया है। फैसले में अरब लीग ने सऊदी अरब और सीरिया के पड़ोसियों लेबनान, जॉर्डन और इराक को मिलाकर एक संचार समिति का भी गठन किया।