अमेरिका ने अपनी सेना के अफगानिस्तान से वापसी के लिए तालिबान से समझौते पर हस्ताक्षर कर लिए हैं लेकिन अफगानों को आशंका है कि अमेरिका ने उन्हें अधर में छोड़ दिया है। चूंकि तालिबान ने अपने साथियों की रिहाई न होने पर अफगान सरकार से युद्ध का मोर्चा खुला रखा है इसलिए उसके सीधे हमले रुकने के आसार नहीं हैं। जबकि अमेरिका इसमें दखल नहीं देगा, इस कारण लोगों में भय है।
अफगानिस्तान में जिन लोगों को तालिबानी शासन का पता है वे जानते हैं कि 2001 में क्या हालात थे। खासकर महिलाओं को चिंता है कि उनके अधिकारों पर कई रुकावटें लग जाएंगी। तालिबान कहता है कि वह बदल गया है लेकिन लड़कियों को स्कूल जाने या महिलाओं को काम चुनने की आजादी नहीं के बराबर ही होगी। तालिबान सह-शिक्षा को स्वीकार नहीं करेगा।
महिलाएं अब भी पुराने दिनों को याद करके सहमी हुई हैं। तालिबान ने जो बदलाव किए हैं उनके मुताबिक महिला जज तो बन सकती है लेकिन मुख्य न्यायाधीन नहीं, नेता बन सकती है लेकिन पीएम नहीं। तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद के इस बयान से अफगानी लोग ज्यादा चिंतित हैं कि अफगान सरकार के विरुद्ध उनका अभियान पहले की तरह ही जारी रहेगा। हालांकि विदेशी बलों पर वह हमला नहीं करेगा।
शर्त आधारित है तालिबान से शांति समझौता : एस्पर
अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने कहा है कि दोहा में पिछले सप्ताह तालिबान से हुआ शांति समझौता शर्तों पर आधारित है। उन्होंने दोहराया कि यह अफगानिस्तान में युद्ध खत्म करने के सियासी समाधान की दिशा में पहला अहम कदम है। अमेरिका और तालिबान ने 18 वर्ष के युद्ध के बाद शनिवार को दोहा में एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए जो इस महीने ओस्लो में होने वाली अंतर-अफगान वार्ता की राह खोलेगा। एस्पर ने कहा कि अमेरिका तालिबान की गतिविधियों पर यह देखने के लिए करीब से नजर रख रहा है कि वे अपनी प्रतिबद्धताओं पर खरे उतर रहे हैं या नहीं।
हिंसा में तत्काल कमी अभी संभव नहीं : यूएस जनरल
अफगानिस्तान के पूर्वी हिस्से में बम विस्फोट में तीन लोगों के मारे जाने के बाद अमेरिकी शीर्ष जनरल ने आगाह किया कि अफगानिस्तान में हिंसा तत्काल रुकने की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल मार्क मिले ने कहा, ‘मैं सभी को यह सोचने के प्रति आगाह करना चाहता हूं कि अफगानिस्तान में पूरी तरह से हिंसा बंद होने वाली है, क्योंकि ऐसा नहीं होने वाला।’