अफगानिस्तान के अंतरिम तालिबान शासन के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी पाकिस्तान के दौरे पर हैं। हाल के महीनों में पाकिस्तानी सुरक्षों बलों पर घातक हमलों को लेकर उन्होंने पाकिस्तान और प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी) को बातचीत के लिए एक साथ बैठने के लिए कहा है।
पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मुत्ताकी द्विपक्षीय और त्रिपक्षीय वार्ता में हिस्सा लेने के लिए चार दिवसीय इस्लामाबाद दौरे पर हैं। आज राष्ट्रीय राजधानी में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने अनुरोध किया कि पाकिस्तानी और टीटीपी वार्ता के लिए एक साथ बैठें।
इस्लामाबाद ने टीटीपी के साथ अफगान तालिबान की मध्यस्थता में कई दौर की वार्ता की थी, लेकिन पिछले साल वार्ता विफल रही थी, जिसके बाद आतंकवादी समूह ने आतंकवादी गतिविधियों को फिर से शुरू कर दिया था। आतंकवादी समूह द्वारा 28 नवंबर को औपचारिक रूप से संघर्ष विराम समाप्त करने के बाद से पाकिस्तान में टीटीपी की हिंसा में वृद्धि देखी गई है।
प्रतिबंधित संगठन टीटीपी, पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच एक विवादास्पद मुद्दा बना हुआ है। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि अगस्त 2021 में सत्ता में वापसी के बाद अफगान तालिबान टीटीपी के संबंध में उसकी चिंताओं को दूर करेगा। लेकिन उम्मीदों के विपरीत टीटीपी के हमले में तेजी आ गई।
टीटीपी, जिसका अफगान तालिबान के साथ वैचारिक संबंध है और जिसे पाकिस्तान तालिबान के नाम से भी जाना जाता है, को 2007 में कई आतंकवादी संगठनों के एक छाता समूह के रूप में स्थापित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य पूरे पाकिस्तान में सख्त इस्लामी शासन लागू करना है।
अफगान तालिबान की टीटीपी का मुकाबला करने की अनिच्छा उसकी आशंकाओं से उपजी है कि समूह के लड़ाके दाएश (इस्लामिक स्टेट) में शामिल हो सकते हैं। दूसरा, अफगान तालिबान और टीटीपी उसी विचारधारा को साझा करते हैं, जिससे उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व वाले विदेशी बलों के साथ लड़ा था। फिर भी, दोनों पक्ष टीटीपी की समस्या से बाहर निकलने का रास्ता खोजने की कोशिश कर रहे हैं।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पिछले महीने अफगान तालिबान के शासकों को चेतावनी दी थी कि अगर तालिबान पाकिस्तान विरोधी आतंकवादियों पर लगाम नहीं लगा पाता है तो युद्धग्रस्त पड़ोसी देश के अंदर आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। उन्होंने पहले कहा था कि प्रतिबंधित टीटीपी पाकिस्तान में हमले करने के लिए अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल कर रहा है।