अफगानिस्तान में महिला विरोधी फरमान
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अफगानिस्तान में महिला विरोधी फरमानों की फेहरिस्त बढ़ती ही जा रही है। तालिबानी हुकूमत ने अब मध्य बामियान प्रांत में बंद-ए-अमीर नेशनल पार्क में महिलाओं के जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। बंद-ए-अमीर अफगानिस्तान के सबसे लोकप्रिय राष्ट्रीय उद्यानों में से एक है।
हालांकि, अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकार को सीमित करने का फैसला कोई नया नहीं है। बीते महीने ही तालिबान ने ब्यूटी सलून को बंद करने का आदेश दिया था। इस बीच हमें जानना जरूरी है कि अफगानिस्तान में हालिया फैसला क्या लिया गया है? इससे पहले कौन से फरमान जारी किए गए हैं? इन फैसलों पर नागरिक समाज क्या कहता है? तालिबान का इन मसलों पर क्या रुख है?
बंद-ए-अमीर नेशनल पार्क
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पहले जानते हैं कि अफगानिस्तान में हालिया फैसला क्या लिया गया है?
तालिबान हुकूमत ने अफगानिस्तान के मध्य बामियान प्रांत में बंद-ए-अमीर नेशनल पार्क में महिलाओं के जाने पर रोक लगा दी है। हर साल हजारों लोग बंद-ए-अमीर नेशनल पार्क का दौरा करते हैं और देश के मध्य बामियान प्रांत में नीलमणि-नीली झीलों और विशाल चट्टानों के नजारों का आनंद लेते हैं।
ताजा आदेश में कार्यवाहक नैतिकता मंत्री मोहम्मद खालिद हनाफी ने सुरक्षा बलों से महिलाओं को पार्क में प्रवेश करने से रोकने के लिए कहा है। हनाफी ने कहा कि महिलाओं के लिए दर्शनीय स्थलों की यात्रा करना जरूरी नहीं है। हनाफी ने तालिबान सुरक्षा बलों और बामियान प्रांत के बुजुर्गों से पार्कों में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को लागू करने में मदद करने का आग्रह किया। अपने भाषण के दौरान, उन्होंने तालिबान के निर्देशों की अवहेलना करने वाले लोगों और तालिबान द्वारा निर्धारित हिजाब नियमों का पालन न करने वाली महिलाओं की भी आलोचना की।
प्रतिबंध की घोषणा तब की गई जब मंत्री हनाफी ने शिकायत की कि पार्क में आने वाली महिलाएं हिजाब पहनने के उचित तरीके का पालन नहीं कर रही हैं।
अफगानिस्तान में ब्यूटी सलून बंद
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इससे पहले कौन से फरमान जारी किए गए हैं?
इससे पहले जुलाई में ही नैतिकता मंत्रालय ने एक महीने के भीतर ब्यूटी सलून को बंद करने का आदेश दिया था। मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद सादिक आकिफ ने मंत्रालय के एक नोटिस का जिक्र करते हुए कहा था, 'महिलाओं के लिए ब्यूटी पार्लरों को बंद करने की समय सीमा एक महीने है।'
2001 में तालिबान के सत्ता से हटने के बाद काबुल और अन्य अफगान शहरों में ब्यूटी सलून खुल गए। करीब दो दशक बाद 2021 में तालिबान फिर सत्ता में आया, तब भी कई सलून खुले रहे। इससे एक ओर जहां कई महिलाओं को नौकरियां मिल रही थीं वहीं उनके ग्राहकों को भी सुविधाएं मिल रही थीं। यहां सलून आमतौर पर केवल महिलाओं के लिए होते हैं और उनकी खिड़कियां ढकी होती हैं ताकि ग्राहकों को बाहर से न देखा जा सके।
काबुल निवासी सहर अपने बालों और नाखूनों को ठीक कराने के लिए एक सलून में जाती थीं। सहर ने कहा कि उन्हें लगता है कि बाहर सुरक्षित रूप से सामाजिक मेलजोल का अंतिम रास्ता अब बंद हो गया है।
एक अन्य महिला ने कहा, 'महिलाओं के लिए पार्क दोस्तों से मिलने के लिए एक अच्छी जगह थी। यह एक-दूसरे को देखने, अन्य महिलाओं, अन्य लड़कियों से मिलने और मुद्दों पर बात करने का एक अच्छा कारण था। महिला ने कहा, 'अब मुझे नहीं पता कि उनसे कैसे मिलूं, उन्हें कैसे देखूं, एक-दूसरे से कैसे बात करूं। मुझे लगता है कि यह हमारे और अफगानिस्तान के आसपास की महिलाओं के लिए बहुत कठिन होगा।'
अफगानिस्तान में महिलाओं का संघर्ष
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स्कूल से कॉलेज तक की मनाही
पिछले साल, तालिबानी अधिकारियों ने अधिकांश लड़कियों के माध्यमिक विद्यालयों को बंद कर दिया। इसके साथ ही महिलाओं को विश्वविद्यालय से प्रतिबंधित कर दिया और कई महिला अफगान सहायता कर्मचारियों को काम करने से रोक दिया। इसके अलावा स्नानघर, जिम और पार्क सहित कई सार्वजनिक स्थान महिलाओं के लिए बंद कर दिए गए हैं।
मानवाधिकार
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इन फैसलों पर नागरिक समाज क्या कहता है?
पश्चिमी देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने संकेत दिया है कि महिलाओं पर प्रतिबंध तालिबान प्रशासन के लिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता की किसी भी संभावित प्रगति में बाधा बन रहे हैं। तालिबान का कहना है कि वह इस्लामी कानून और अफगान रीति-रिवाजों की अपनी व्याख्या के अनुसार महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करता है।
ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने हालिया रोक के बाद अफगान महिलाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों की बढ़ती सूची पर चिंता जताई है। एचआरडब्ल्यू की हीदर बर्र ने कहा कि अफगान महिलाओं और लड़कियों पर तालिबान के दमन को रोकने के लिए दुनिया को अब एकजुट होना चाहिए।
बर्र ने कहा, 'मैंने कई अफगान महिलाओं को यह बात करते हुए सुना है कि कैसे तालिबान उन्हें अगली बार सांस लेने की अनुमति नहीं देगा। यह बहुत अतिशयोक्तिपूर्ण लगता है। धीरे-धीरे महिलाओं के लिए दीवारें बंद होती जा रही हैं क्योंकि हर घर एक जेल बन रहा है।'
अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक का बयान भी आया है। रिचर्ड बेनेट ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'क्या कोई बता सकता है कि शरिया और अफगान संस्कृति का पालन करने के लिए बैंड-ए-अमीर में महिलाओं के जाने पर यह प्रतिबंध क्यों जरूरी है?'
Afghanistan
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तालिबान इन फैसलों पर क्या कहता है?
तालिबान ने लंबे समय से यही तर्क दिया है कि वे इस्लामी कानून और अफगान रीति-रिवाजों की समूह की व्याख्या के अनुसार महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करते हैं।