बलूचिस्तान प्रांत तभी से अस्थिर बना हुआ है जब से चीन ने इस क्षेत्र में प्रवेश किया है और ग्वादर में बंदरगाह का निर्माण शुरू किया है। बंदरगाह निर्माण की शर्तों के अनुसार चीन को 40 वर्षों के लिए वहां उत्पन्न होने वाले राजस्व का 90 फीसदी हिस्सा प्राप्त होगा।
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और बलूच गोरिल्ला लड़ाकों के बीच हिंसक सघर्षों के बीच एक राजनीतिक कार्यकर्ता ने दावा किया है कि सेना और आतंकी संगठन क्षेत्रम में स्थानीय लोगों को दबा रहे हैं। निर्वासन में रह रहे बलूच राजनीतिक कार्यकर्ता मनीर मेंगल का कहना है कि पाकिस्तान बलूच लोगों के बीच अपने भरोसे को खो रहा है और प्रतिरोध बढ़ रहा है।
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मुनीर ने कहा, 'यहां पर एक तो सेना का शासन है और दूसरा आतंकी संगठनों का शासन है, जो पाकिस्तान की संपत्तियों की तरह हैं। पाकिस्तान राज्य बलूचिस्तान में गहराई से घुसने के उद्देश्य से बलूच राष्ट्रवादियों को खत्म करने के लिए इन आतंकवादी संगठनों का इस्तेमाल कर रहा है। बलूचिस्तान में अधिकारों के हनन के संबंध में न्यायपालिका और पुलिस, सभी संस्थान अप्रासंगिक हैं।
हाल ही में नौशकी और पंजगुर इलाकों में बलूच विद्रोहियों ने पाकिस्तानी सेना के फ्रंटियर कॉर्प्स कैंप पर हमला किया थे। इसमें कम से कम नौ सैनिक और 20 आतंकवादी मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी प्रतिबंधित बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने ली है। इससे पहले बलूचिस्तान के केच में हुए बीएलएफ के एक हमले में कम से कम 10 पाकिस्तानी सैनिकों की जान गई थी।
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बलूच वाइस एसोसिएशन के अध्यक्ष मुनीर ने कहा कि बलूचिस्तान में लोगों के पास कोई अधिकार नहीं है। समृद्ध खनिज भंडार होने के बावजूद इस क्षेत्र में अत्यधिक गरीबी है। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान के अंदर के लोग मार्शल लॉ के तहत रह रहे हैं जहां सेना जो करना चाहती है वह करती है। वह लोगों के अधिकारों का हनन कर रहे हैं। वह लोगों का अपहरण और उनकी हत्या कर रहे हैं।
मनीर ने कहा, 'दुर्भाग्य से पिछले कुछ सप्ताहों से हमें बलूचिस्तान से जो भी सुनने को मिला है, यहां न तो स्थानीय मीडिया को और न ही अंतरराष्ट्रीय मीडिया को जाने की अनुमति दी जा रही है।' मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान बलूच लड़ाकों का सामना करने के लिए पाकिस्तान ने अपनी वायु सेना का इस्तेमाल किया है। उन्होंने बलूचिस्तान के मुद्दों को संबोधित करने में सरकार को नाकाम बताया।