भारत सरकार की छह लाख से अधिक गांवों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ने वाली योजना ऐसी है जिसमें कोरोना महामारी के बाद की दुनिया में देश को बेहतर ढंग से तैयार करने पर बल दिया जा रहा है। यह योजना सूचनाओं और सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाने पर केंद्रित है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के प्रशासक ए. स्टेनर ने यह बात कही और उन्होंने इस योजना की सराहना की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से देश के छह लाख से अधिक गांवों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ने की योजना का एलान किया था। इसे अगले 1000 दिन में पूरा किया जाएगा। स्टेनर ने कहा कि वह पीएम मोदी की इस घोषणा का स्वागत करते हैं। संकट के इस वक्त अहम परियोजनाओं के बारे में न केवल सोचने की आवश्यकता है बल्कि हकीकत में इनके कार्यान्वित और वित्तपोषित करने की भी जरूरत है। ऐसा इसलिए क्योंकि कोरोना संकट के बाद के समय के लिए रणनीति के लिहाज से यह आगे बढ़ने के लिए सही है।
उन्होंने कहा कि वे अपने स्वभाव के हिसाब से गरीबों को शामिल करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं क्योंकि गांवों को जोड़कर हम सूचना और सेवाओं तक लोगों की पहुंच बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण प्रगति करेंगे। उन्होंने कहा कि हम भारत को सॉफ्टवेयर विकास, प्रौद्योगिकी से विकास के परिणामों को जोड़ने में अग्रणी देशों में से एक मानते हैं।
कुछ काम हम भारतीय निजी क्षेत्र के साथ ही नीति आयोग सहित सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के साथ कर रहे हैं। स्टेनर ने कहा कि वह यूएनडीपी के प्रमुख के रूप में संयुक्त राष्ट्र महासचिव के साथ मिलकर लगातार देशों से कोविड-19 के मद्देनजर उत्पन्न संकट के इस समय का लाभ उठाने की अपील कर रहे हैं।