अमेरिकी कार निर्माता कंपनी टेस्ला ने चीन से शिनजियांग प्रांत में अपने शोरूम खोलने का एलान कर एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। अमेरिका में कई हलकों से इस कदम के लिए टेस्ला और उसके मालिक एलन मस्क की कड़ी आलोचना हुई है।
चीन ने आरोपों का खंडन किया
अमेरिका लगातार आरोप लगाता रहा है कि चीन ने शिनजियांग प्रांत में उइघर मुसलमानों का नरसंहार किया है। अमेरिकी मीडिया में ये आरोप बहुचर्चित रहे हैं। चीन पर उस प्रांत में लोगों को सामूहिक बंदी बनाने, जबरन परिवार नियोजन का ऑपरेशन करने, और उइघुर लोगों की पहचान नष्ट करने के आरोप लगाए जाते रहे हैं। चीन इन आरोपों का खंडन करता रहा है। उसने ऐसे तमाम इल्जामों को मनगढ़ंत करार दिया है।
बताया जाता है कि टेस्ला कंपनी वहां अपने तकरीबन 30 स्टोर खोल चुकी है। कंपनी तरफ से बीते 31 दिसंबर को इस बारे में पहली बार जानकारी दी गई। ट्विटर और चीन की ट्विटर जैसी माइक्रोब्लॉगिंग साइट वियेबो पर अपने अकाउंट के जरिए टेस्ला ने उस क्षेत्र में अपने स्टोर खोलने की घोषणा की। इस बारे में सबसे पहले खबर अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने छापी।
टेस्ला के इस एलान से कुछ ही दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने एक नए कानून पर दस्तखत किए थे। उस कानून के मुताबिक शिनजियांग प्रांत से अमेरिका में किसी प्रकार के आयात पर रोक लगा दी गई है। ये आरोप इस शिकायत के आधार पर लगाए गए हैं कि शिनजियांग में जबरिया मजदूरी कराई जाती है। टेस्ला के इस एलान को इस नए अमेरिकी कानून की भावना का खुला उल्लंघन समझा गया है। टेस्ला की घोषणा के मुताबिक उसने शिनजियांग प्रांत में बिक्री और डेलिवरी की सेवा देने के स्टोर शुरू किए हैं। टेस्ला ने अपने ट्विटर और वियेबो पोस्ट में कहा- ‘आइए, 2022 में हम शिनजियांग में अपनी इलेक्ट्रिक यात्रा शुरू करेँ।’
टेस्ला ने शंघाई में लगाई थी पहली फैक्टरी
इस एलान के बाद से टेस्ला ने अमेरिकी मीडिया की तरफ से पूछे गए सवालों पर कोई जवाब नहीं दिया है। लेकिन बाजार के जानकारों का कहना है कि चीन में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री का टेस्ला के मुनाफे में बढ़ोतरी में बड़ा योगदान रहा है। टेस्ला ने इलेक्ट्रिक कारों की अपनी पहली फैक्टरी चीनी शहर शंघाई में ही लगाई थी। ये फैक्टरी 2020 में चालू हुई।
बाजार जानकारों ने ध्यान दिलाया है कि शिनजियांग में अपने स्टोर खोलने वाली टेस्ला पहली अमेरिकी कंपनी नहीं है। इसके पहले एपल कंपनी भी वहां अपने स्टोर शुरू कर चुकी है। एपल के लिए भी चीन एक महत्त्वपूर्ण बाजार है। थिंक ऑस्ट्रेलियन स्ट्रेटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट ने अपनी एक रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि एपल को पुर्जों की सप्लाई करने वाली कंपनियों में वे कंपनियां भी शामिल हैं जिनमें जबरिया मजदूरी का सहारा लिया जाता है। लेकिन एपल के सीईओ टिम कुक ने बीते नवंबर में कहा था कि एपल की ‘जिम्मेदारी’ हर जगह कारोबार करना है, जिनमें चीन भी शामिल है।
एपल के अलावा वॉलमार्ट, और गूगल भी ऐसी बड़ी अमेरिकी कंपनियां हैं, जिन पर शिनजियांग प्रांत से जुड़े मसले की अनदेखी करने का आरोप रहा है। अब इस श्रेणी में टेस्ला भी शामिल हो गई है।