फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर के मतदान से एक दिन पहले यहां ये आम राय है कि राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को दूसरे कार्यकाल के लिए जनादेश मिल जाएगा। लेकिन इस बार धुर दक्षिणपंथी नेता मेरी ली पेन से उनकी जीत का अंतर पांच साल पहले की तुलना में काफी कम रहेगा। ली पेन ने इस बार मैक्रों को कड़ी टक्कर दी है।
रविवार को मतदान स्थानीय समय के अनुसार सुबह आठ बजे (भारतीय समय के अनुसार दिन में 11.30 बजे) शुरू होगा। शाम सात बजे यानी भारतीय समय के अनुसार 10.30 बजे मतदान बंद होगा। तभी एग्जिट पोल के पहले नतीजे जारी किए जाएंगे। चुनाव प्रचार शुक्रवार आधी रात को बंद हुआ। उसके पहले मैक्रों और ली पेन ने एक दूसरे पर जोरदार हमले बोले।
ली पेन ने धुर दक्षिणपंथी वाले बयान पर जताया एतराज
ली पेन की पार्टी नेशनल रैली ने चुनाव पूर्व जनमत सर्वेक्षणों में लगाए गए अनुमानों को बेबुनियाद बताया है। शुक्रवार रात ली पेन ने कहा- ‘चुनाव परिणाम जनमत सर्वेक्षणों से नहीं, असल मतदान से तय होते हैं।’ उन्होंने मैक्रों के इन बयानों पर एतराज जताया कि ली पेन के समर्थक धुर दक्षिणपंथी हैं। उन्होंने कहा कि यह लाखों लोगों का अपमान है। उधर मैक्रों ने ली पेन पर फ्रांस को बांटने का आरोप दोहराया। मैक्रों ने कहा कि हिजाब पहनने पर रोक लगाने की बात करके ली पेन मुस्लिम नागरिकों को बदनाम कर रही हैं। उन्होंने कहा- ‘धुर दक्षिणपंथी भय और गुस्सा फैला कर ही जीवित रहता है। वह कहता है कि समाज के एक हिस्से को बहिष्कृत करना ही समस्या का समाधान है।’
विश्लेषकों का कहना है कि दूसरे दौर के मतदान से पहले ली पेन ने अपनी उदारवादी छवि बनाने की कोशिश की है। उन्होंने ज्यादा आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित किया। मैक्रों के रिटायरमेंट की उम्र बढ़ा कर 65 साल करने के वादे को उन्होंने जन विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि वे राष्ट्रपति बनीं, तो उनका ध्यान रोजगार पैदा करने और कामकाज की शर्तों को कर्मचारियों के अनुकूल बनाने पर होगा।
मैक्रों को 57.5 फीसदी तक वोट मिलने की संभावना
गुरुवार और शुक्रवार को कई जनमत सर्वेक्षणों की रिपोर्टें जारी हुईं। इनके मुताबिक मैक्रों को 55.5 से 57.5 फीसदी वोट मिलने की संभावना है। उधर ली पेन को 42.5 से 44.5 के बीच वोट मिलने की संभावना जताई गई है। पांच साल पहले भी दूसरे दौर के मतदान में मैक्रों और ली पेन के बीच ही मुकाबला हुआ था। तब मैक्रों को 66 फीसदी वोट मिले थे, जबकि ली पेन 34 फीसदी वोट ही पा सकी थीं।
सर्वे नतीजों के आधार पर विश्लेषकों ने कहा है कि पांच साल में मैक्रों की लोकप्रियता में काफी गिरावट आई है। हालांकि अभी भी वे आराम से जीतते दिख रहे हैं, लेकिन अगर मतदान प्रतिशत कम रहा, तो उन्हें मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है। मीडिया टिप्पणियों में बताया गया है कि दोनों उम्मीदवारों की खास उम्मीद उन मतदाताओं पर टिकी है, जिन्होंने पहले चरण के मतदान में धुर वामपंथी नेता ज्यां लुक मेलेन्शॉं को वोट दिया था। मेलेन्शॉं को 22.5 फीसदी वोट मिले थे। ये मतदाता आम तौर पर मैक्रों विरोधी माने जाते हैं। लेकिन वे धुर दक्षिणपंथी उम्मीदवार को वोट देंगे, इसकी संभावना भी कम समझी जाती है।