एक स्थानीय मुस्लिम युवा शफीक के अनुसार मंदिर में आने वाले हिंदू पुल से कई वस्तुएं समुद्र में फेंकते हैं, इनमें कई कीमती वस्तुएं होती हैं, इसका मतलब यह है कि स्थानीय लड़के इन वस्तुओं को एकत्र करके अपनी आजीविका चला सकते हैं।
20 वर्षीय शफीक और 17 वर्षीय अली कुछ अन्य लोगों के साथ अक्सर ऐसी वस्तुएं निकालने के लिए समुद्र में छलांग लगाते रहते हैं। शफीक के मुताबिक, लड़कों को सोने और चांदी के जेवर, सिक्के और कई अन्य कीमती वस्तुएं मिली हैं। उसने कहा, 'हमने खुद को प्रशिक्षण दिया और पेशेवर गोताखोर और तैराक बन गए हैं। हम पानी के अंदर लंबे समय तक सांस रोक सकते हैं और वस्तुएं खोज सकते हैं।
यह पूछने पर किया क्या मंदिर आने वाले श्रद्धालु या मंदिर की देखभाल करने वाले इस पर आपत्ति जताते हैं, अली ने कहा कि कभी-कभार वह चिल्लाते हैं और जाने को कहते हैं। अली ने कहा, जब ऐसा होने लगता है तो हम कुछ दिन के लिए चले जाते हैं लेकिन बाद में फिर पुल पर अपनी जगह आ जाते हैं। हम यहां तब तक रहते हैं जब कर मंदिर पूजा के लिए खुला होता है। पूरा दिन हम समुद्र में फेंकी कई वस्तुएं ढूंढते रहते हैं।
यह पूछने पर कि वह समुद्र में मिली वस्तुओं का क्या करते हैं, अली ने कहा कि वह इन चीजों को बेच देते हैं। शफीक ने बताया कि पिछले कुछ सालों में हमें समुद्र में कई वस्तुएं मिली हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी पूजा और रिवाजों में बहुत लीन रहते हैं। अली का कहना है कि फिलहाल कोरोना वायरस के चलते यहां आने वाले लोगों की संख्या बहुत कम हो गई है, इससे उनकी आजीविका संकट में आ गई है।
मंदिर की देखरेख करने वाले लोगों में से एक विवेक ने कहा, 'इन दिनों कोरोना वायरस संकट की वजह से श्रद्धालुओं की संख्या काफी कम रहती है। हम सोशल डिस्टेंसिग का पालन कर रहे हैं और मंदिर में चार या पांच से ज्यादा लोगों को एक साथ आने की अनुमति नहीं दे रहे हैं।' बता दें कि आधिकारिक अनुमान के मुताबिक, पाकिस्तान में 75 लाख हिंदू रहते हैं। हालांकि, समुदाय के मुताबिक पाक में रहने वाले हिंदुओं की संख्या 90 लाख से भी ज्यादा है। पाकिस्तान में हिंदू आबादी का बड़ा हिस्सा सिंध प्रांत में रहता है।