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रहस्यमयी तरीके से घटी पेंगुइन पक्षी की संख्या,35 सालों में 90% तक हुए कम

Wed, 01 Aug 2018 04:22 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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लुफ्त होते पक्षी
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इंसानों की तरह व्यवहार करने वाले और दिखने में बेहद प्यारे लगने वाले पेंगुइन पक्षी लुप्त होने की कगार पर पहुंच गए हैं। दुनिया में पेंगुइन पक्षियों की सबसे बड़ी बस्ती में इनकी संख्या आश्चर्यजनक ढंग से 90% तक कम हो गई है। पिछले 35 सालों में पेंगुइन पक्षियों की तादाद में इतनी बड़ी गिरावट दुनिया भर के पर्यावरण संरक्षक और पक्षी प्रेमियों के लिए चिंता की बात है। वैज्ञानिकों के मुताबिक ऐसा होने के पीछे की वजह नहीं मालूम हो पा रही और प्रयास जारी है।

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अंटार्कटिका विज्ञान जर्नल रिपोर्ट के अनुसार हवाई सर्वेक्षण और उपग्रह से मिली तस्वीरों से पता चलता है कि प्रजनन में सक्षम जोड़ों की संख्या में 88% की कमी आ चुकी है। आपको बता दें कि ये रिपोर्ट इस लिए भी खतरे की घंटी है क्योंकि ये पेंगुइन फ्रांस के एले ऑक्स कोशोंस के हैं। हिंंद महासागर में अफ्रीका और अंटार्कटिका के बीच बसा पेंगुइन पक्षियों का ये झुंड दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गढ़ है।

 

जर्नल की रिपोर्ट से 2015 से 2017 तक के 60,000 पेंगुइन जोड़ों का रिकॉर्ड मिलता है जो 1980 में पाए गए जोड़ों से अाधे से भी ज्यादा कम थे। इनकी प्रजातियों में एम्पेरर पंगुइन के बाद किंग पेंगुइन आते हैं जो प्रजनन के लिए ज्यादा शितोष्ण स्थान का रुख करते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक तेजी से हो रहे पर्यावरण बदलाव की वजह से भी इनकी संख्या कम हो सकती है।

 

उड़ने में असमर्थ पक्षी पेंगुइन हमारी सोच से भी पहले से धरती पर मौजूद हैं। यह बात चीनी वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक नवीन अध्ययन में सामने आई है। वैज्ञानिक अब तक मानते आए हैं कि पेंगुइन करीब 6,000 साल से धरती पर मौजूद हैं, लेकिन नवीन अध्ययन इनके पूर्व अंटार्कटिका में 14,600 साल पहले मौजूद होने के साक्ष्य मिले हैं।
 

न्यूजीलैंड के जंगलों से गैलापागोस के ज्वालामुखीय द्वीपों तक और दक्षिणी अफ्रीका के समुद्र तटों से लेकर सुबांटार्क्टिक द्वीप समूह तक रहने वाले कई जगहों पर उनका कब्जा है। लेकिन लुप्त होने के कगार पर पहुंच गए प्रजातियों की तरह हम पेंगुइन को बचाने के लिए जरूरी कोसिश नहीं कर रहे हैं और ये विलुप्त होने की कगार पर हैं।

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