कोरोना महामारी को एक साल पूरे हो चुके हैं। जानलेवा वायरस अब म्यूटेशन कर दुनिया को फिर अपने आगोश में ले रहा है। बहुरूपिया वायरस का काट पता करने में जुटे वैज्ञानिक के सामने अब नई चुनौती खड़ी हो गई है।
हर्ड इम्यूनिटी पर भी असमंजस की स्थिति है और इसको लेकर वैज्ञानिकों ने अब अपना पैमाना ही बदल दिया है। अमेरिकी इम्युनोलॉजिस्ट डॉक्टर एंथोनी फौची पहले कह रहे थे कि दुनिया की 60 से 70 फीसदी आबादी जब संक्रमण की चपेट में आ जाएगी तो वायरस के खिलाफ हर्ड इम्युनिटी बन जाएगी।
90 फीसदी लोग संक्रमण की चपेट में आएंगे, तब आएगी हर्ड इम्यूनिटी
महामारी का रूप विकराल होने लगा तो यह आंकड़ा 70 से 75 फीसदी हुआ। दुनिया भर में संक्रमण से मौतों का ग्राफ बेकाबू हुआ तो यह दर 80 से 85 फीसदी पहुंच गई। अब जब दुनिया के कई देशों में वायरस में म्यूटेशन के साथ कई रूप का पता चला है तो कहा जा रहा है कि अब करीब 90 फीसदी आबादी संक्रमण की चपेट में आएगी तभी हर्ड इम्युनिटी संभव है।
हालांकि इसका दूसरा खतरा यह है कि संक्रमण के कारण मौतों का ग्राफ बढ़ सकता है। नए स्ट्रेन से आने वाले समय में क्या होगा अभी कुछ भी साफ नहीं है। खसरा का प्रकोप बढ़ने पर ऐसा देखने को मिल चुका है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस जितना अधिक संक्रामक होगा हर्ड इम्युनिटी हासिल करना उतना अधिक आसान होगा बशर्ते वायरस जानलेवा न हो। नए स्ट्रेन को लेकर अभी तक ऐसा ही अनुमान लगाया जा रहा है।
कोरोना खसरे से ज्यादा संक्रामक नहीं है। मैं यह दावे के साथ कह सकता हूं। ऐसे में जब कोरोना के खिलाफ 90 फीसदी हर्ड इम्युनिटी बन जाती है तो वायरस का प्रकोप थम सकता है। खसरा दुनिया की सबसे संक्रामक बीमारी है जिसका वायरस घंटों तक हवा में रह सकता है और एक कमरे से दूसरे कमरे में पहुंच लोगों को संक्रमित कर सकता है।
- डॉ. एंथनी फौची अमेरिकी इम्यूनोलॉजिस्ट