ऐसे वक्त जब देश के कई हिस्से पहले ही बढ़ते तापमान की चपेट में हैं, घातक लू की वजह से करीब 90% भारतीयों पर रोगों, भोजन की कमी और मौत के खतरे बढ़े हैं। 2022 में भी जलवायु परिवर्तन के साथ लू ने काफी नुकसान पहुंचाया। इस वजह से भारत सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) को हासिल करने में भी पिछड़ रहा है। यह दावे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने बृहस्पतिवार को जारी अध्ययन में किए।
इस अध्ययन में वर्ष 2001 से 2021 के दौरान एसडीजी हासिल करने के लिए भारत के प्रदर्शन और भीषण मौसम के हालात का साझा मूल्यांकन किया गया। सामने आया कि भारत 17 में से 11 लक्ष्य हासिल नहीं कर पा रहा है। भुखमरी खत्म करने, अच्छा स्वास्थ्य हासिल करने, लैंगिक समानता लाने, उचित कार्य व आर्थिक विकास, उद्योग-इनोवेशन-बुनियादी ढांचे, असमानता मिटाने और पर्यावरण संरक्षण जैसे लक्ष्यों में प्रगति धीमी हुई है। अध्ययन का नेतृत्व करने वाले डॉ. रमित देबनाथ के अनुसार भारत जलवायु परिवर्तन के नुकसान के राष्ट्रीय सूचकांक (सीवीआई) से हालात को आंकता है और निपटने की योजनाएं बनाता है।
'हीट इंडेक्स' आवश्यक
रिपोर्ट के अनुसार घातक गर्मी और लू के लोगों के शरीर पर सीधे असर को जानना ज्यादा जरूरी है। सीवीआई से यह पता नहीं चलता। किस हिस्से की जनता पर गर्मी व लू का ज्यादा खतरा है, मानव शरीर को क्या नुकसान हो रहे हैं, इसे जानने के लिए 'हीट इंडेक्स' का उपयोग होना चाहिए।
एनसीआर डेंजर जोन में
अध्ययन में शामिल डॉ. रोनिता बर्धन के अनुसार दिल्ली जैसे शहरों में छोटे घरों में रहने को मजबूर लोगों के पास गर्मी से बचाव के साधन कम हैं। उन पर हो रहे असर का व्यापक मूल्यांकन जरूरी है। जहां सीवीआई के अनुसार भारत की 20 प्रतिशत आबादी पर जलवायु परिवर्तन का खतरा है। हीट इंडेक्स बताता है कि 90 प्रतिशत भारतीय घातक लू के असर वाले क्षेत्रों में रह रहे हैं। दिल्ली सहित पूरा एनसीआर इस डेंजर जोन में है।