पेनी कहती हैं, 'हम उसे (फ्लाइट 93 को मार गिराने नहीं जा रहे थे। हम विमान को घेरने जा रहे थे।' पेनी उस पल को याद करते हुए कहती हैं, 'मैं निश्चित तौर पर एक आत्मघाती पायलट बनने जा रही थी।' उस घटना के 10 साल बाद अब पेनी ने उस घटना के बारे में खुलकर बोलना शुरू किया है।
पेनी सबसे पहली महिला लड़ाकू पायलटों में से एक थीं। अब वह लॉकहीड मार्टिन के लिए काम कर रही हैं, जहां वह एफ-35 प्रोग्राम को निर्देशित करने में सहायता करती हैं। वह कहती है, 'हमें एयर स्पेस को बचाना ही था, फिर इसे चाहे जिस तरह से करना पड़ता।' उस दिन वाशिंगटन के आसमान की रक्षा के लिए कोई भी विमान तैनात नहीं थी, एक भी नहीं, जो मुकाबला कर सकता।
एंड्रयूज एयर बेस पर 113वीं विंग के वाइस कमांडर कर्नल जॉर्ज डेग्नॉन कहते हैं, 'उस समय किसी तरह के खतरे की जानकारी नहीं थी, खास कर वैसे खतरे की जो हुआ। यह कुछ ऐसी स्थिति थी जब हम असहाय महसूस कर रहे थे, लेकिन हमने विमान को हथियारों से लैस करने की और उसे हवा में ले जाने की हर संभव कोशिश की। '
किसी विमान को हथियारों से लैस करने में कम से कम एक घंटे का समय लगता है और यह काम शुरू किया जा चुका था, लेकिन उन्हें तुरंत उड़ान भरने वाले पायलटों की बहुत जरूरत थी। पेनी के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल मार्क सेसविल ने पेनी को उनके साथ आने का आदेश दिया।
सेसविल ने कहा, 'मैं कॉकपिट में जा रहा हूं।' पेनी ने कहा कि वह पीछे की ओर जा रही है। इसते साथ ही दोनों उड़ान से पहले की जाने वाली जांचों को छोड़ते हुए विमान को हवा में ले गए।
अब पेंटागन में तैनात सेसविल कहते हैं, 'हमें यात्री विमानों को मार गिराने का प्रशिक्षण नहीं देते हैं। हमने सोचा कि अगर हम सीधा इंजन पर टकराए तो भी विमान के किसी निशाने पर टकराने की आशंका है। मैं सोच रहा था कि या तो विमान के कॉकपिट पर टकराएं या विंग पर।'
सेसविल की योजना थी कि एफ-16 को इतनी तेजी के साथ फ्लाइट 93 से टकराया जाए कि पायलट को इजेक्ट करने का भी समय मिल दाए। हालांकि, पायलट को इजेक्ट करने के लिए एक सेकेंड से भी कम समय मिलने वाला था।
सेसविल कहते हैं, 'मैं ये दोनों काम एक साथ करने का सोच रहा था। शायद यह पूरी तरह सफल होने वाला नहीं था, लेकिन हम भी यही सोच रहे थे।' पेनी उस समय को याद करते हुए कहती हैं, 'अगर आप इजेक्ट कर जाते और इसके प्रभाव से जेट बिना विमान से टकराए निकल जाता तो?' पेनी का इजेक्ट करने का कोई इरादा नहीं था।
हालांकि, अंत में उन्हें अपना बलिदान नहीं देना पड़ा। फ्लाइट 93 पेनसिल्वेनिया में क्रैश हो गई। विमान में सवार यात्री अपहरणकर्ताओं से भिड़ गए और विमान एक निर्जन स्थान पर क्रैश हो गया। पेनी कहती हैं, 'असली हीरो फ्लाइट 93 में सवार यात्री थे जिन्होंने अपना बलिदान दे दिया। मैं इस घटना की संयोगवश एक गवाह थी।'
इस सवाल पर कि क्यों उन्होंने एक आत्मघाती मिशन पर जाने का फैसला लिया, पेनी बिना हिचकिचाए कहती हैं, 'क्यों? क्योंकि इस दुनिया में कई ऐसी चीजें हैं जो हमसे ज्यादा जरूरी हैं। आजादी। अमेरिका का संविधान। हमारे जीने का तरीका। मां, बेसबॉल, एपल पाई; ये चीजें और ऐसी कई दूसरी चीजें जो हमें अमेरिकी बनाती हैं। हम अपने से किसी कहीं बड़े कारण के लिए हैं।'