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9/11 हमले की बरसी: वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर चार हमले और हजारों मौत, वारदात के 25 साल बाद भी जिंदा हैं पांच सवाल

Fri, 11 Sep 2026 06:19 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

अमेरिका में 9/11 को हुए भीषण आतंकी हमलों के 25 साल पूरे होने पर पुरानी यादें फिर ताजा हो गई हैं। चार अपहृत विमानों से वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन पर हुए हमलों में हजारों बेकसूर लोगों की जान चली गई थी। यह इतिहास का सबसे बड़ा हमला था। मगर इतने साल गुजरने के बाद भी कई बुनियादी सवाल आज भी जिंदा हैं कि आखिर दुनिया की सबसे ताकतवर सुरक्षा व्यवस्था उस दिन कैसे नाकाम हो गई? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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ये पांच सवाल अब भी अधूरे - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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11 सितंबर 2001 को अमेरिका की धरती पर हुए भयानक आतंकी हमले को पूरे 25 साल बीत चुके हैं। उस दिन आतंकियों ने एक साथ चार यात्री विमानों का अपहरण करके दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क को दहला दिया था। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के विशाल ट्विन टावर्स और अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन पर हुए इन हमलों में हजारों निर्दोष लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस त्रासदी ने पूरी दुनिया की सुरक्षा नीति और इतिहास को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया। अमेरिका को मिले इस गहरे जख्म के ढाई दशक बाद भी यह खौफनाक मंजर लोगों के जेहन में ताजा है। आज जब 25वीं बरसी पर इस काले दिन को याद किया जा रहा है, तो इस घटना से जुड़े कई अनसुलझे रहस्य और बुनियादी सवाल एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने आकर खड़े हो गए हैं।

पहले जान लेते हैं क्या हुआ था उस दिन?

उस दिन चार विमानों के जरिए अमेरिका के अलग-अलग ठिकानों को निशाना बनाया गया था। दो विमान न्यूयॉर्क में स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के गगनचुंबी टावरों से टकराए, तीसरा विमान पेंटागन की इमारत में जा घुसा और चौथा विमान पेंसिलवेनिया के एक मैदान में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। कुछ ही घंटों के भीतर अमेरिका की शान कहे जाने वाले गगनचुंबी ट्विन टावर्स आग की लपटों में घिरकर मलबे के ढेर में तब्दील हो गए थे। इस हमले में हजारों आम नागरिकों, दमकलकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान गंवा दी थी। इस तबाही ने अमेरिका की अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था के तमाम दावों पर पानी फेर दिया था। आज 25 साल बीत जाने के बाद भी लोग यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इतने बड़े स्तर पर यह हमला कैसे संभव हो सका। 
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क्या थे वे मुख्य सवाल जो 25 साल बाद भी बने हुए हैं पहेली?

  1. आखिर दुनिया की सबसे ताकतवर वायुसेना चारों अपहृत विमानों में से एक को भी समय रहते क्यों नहीं रोक सकी?
  2. ट्विन टावर्स इतनी तेजी से कैसे ढह गए, जबकि आग कुछ ही मंजिलों तक सीमित थी और कुछ घंटों से ज्यादा नहीं चली थी?
  3. एक शौकिया पायलट एक बड़े यात्री विमान को इतनी सटीकता से उड़ाकर पेंटागन तक कैसे पहुंचा और वहां हमला कैसे कर पाया, जबकि संभावित अपहरण की सूचना काफी पहले मिल चुकी थी?
  4. फ्लाइट 93, पेंसिलवेनिया के शैंक्सविले में ही क्यों दुर्घटनाग्रस्त हुई? दुर्घटनास्थल इतना छोटा क्यों दिखाई दिया और वहां विमान का बड़ा मलबा नजर क्यों नहीं आया?
  5. वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की वह ऊंची इमारत इतनी जल्दी कैसे गिर गई, जिससे कोई विमान टकराया ही नहीं था? क्या सिर्फ आग और संरचनात्मक क्षति इतनी बड़ी इमारत को गिराने के लिए पर्याप्त थे?

आइए एक-एक कर सभी सवालों के जवाबों को समझने की कोशिश करते हैं-


सवाल- दुनिया की सबसे ताकतवर वायुसेना चारों विमानों को क्यों नहीं रोक सकी?
जवाब- अमेरिका की हवाई सुरक्षा और उसकी वायुसेना को पूरी दुनिया में सबसे आधुनिक और तेज माना जाता है। किसी भी आपात स्थिति में लड़ाकू विमान मिनटों में हवा में पहुंचकर खतरे को खत्म करने की क्षमता रखते हैं। लेकिन 11 सितंबर के उस मनहूस दिन आतंकियों ने एक के बाद एक चार बड़े कॉमर्शियल विमानों पर कब्जा कर लिया और उन्हें अपने मनचाहे लक्ष्यों की तरफ मोड़ दिया। यह पूरी प्रक्रिया कई मिनटों तक चलती रही। चारों विमानों का संपर्क टूटने और उनके मार्ग बदलने के बावजूद वायुसेना के लड़ाकू जेट समय पर उन्हें इंटरसेप्ट क्यों नहीं कर सके? यह सवाल आज भी हर किसी के जेहन में उठता है कि तकनीक और रडार के इतने मजबूत जाल के बावजूद वे विमान अपने निशाने तक बेरोकटोक कैसे पहुंच गए।
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सवाल- ट्विन टावर्स इतनी तेजी से ताश के पत्तों की तरह कैसे ढह गए?
जवाब- वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के दोनों टावर आधुनिक इंजीनियरिंग के बेजोड़ नमूने थे और उन्हें भारी तूफानों व बड़े झटकों को झेलने के लिए डिजाइन किया गया था। जब विमान उनसे टकराए, तो आग की लपटें इमारतों की कुछ ही मंजिलों तक सीमित थीं। यह आग भी कुछ घंटों से ज्यादा देर तक नहीं भड़की थी। इसके बावजूद इतने विशाल और मजबूत लोहे के ढांचे बेहद कम समय में एक सीधी रेखा में नीचे की ओर ढह गए। कई लोगों के मन में आज भी यह शंका बनी हुई है कि क्या सिर्फ ऊपरी मंजिलों पर लगी आग और जेट ईंधन की गर्मी पूरे ढांचे को इतनी तेजी से और पूरी तरह से जमींदोज करने के लिए काफी थी।

सवाल- एक नौसिखिया पायलट पेंटागन जैसी सुरक्षित इमारत तक कैसे पहुंच गया?
जवाब- पेंटागन को दुनिया की सबसे सुरक्षित इमारतों में से एक माना जाता है, जो अमेरिकी सैन्य शक्ति का मुख्य केंद्र है। इस इमारत का हवाई क्षेत्र सबसे कड़ा नो-फ्लाई जोन था। जांच में यह सामने आया कि जिस विमान ने पेंटागन को निशाना बनाया, उसे उड़ाने वाले के पास केवल सामान्य प्रशिक्षण था। ऐसे में एक शौकिया पायलट इतने बड़े और भारी यात्री विमान को जमीन के बिल्कुल समानांतर, बेहद जटिल और सटीक मोड़ देते हुए पेंटागन की दीवार से टकराने में कैसे कामयाब हो गया? इसके अलावा, जब न्यूयॉर्क में हमलों के बाद पूरे देश में संभावित अपहरण की सूचना पहले ही मिल चुकी थी, तो पेंटागन की सुरक्षा प्रणाली समय रहते सक्रिय क्यों नहीं हो पाई?

सवाल- फ्लाइट 93 के मलबे और दुर्घटनास्थल को लेकर क्या पहेली है?
जवाब- चौथा विमान यानी यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट 93 पेंसिलवेनिया के शैंक्सविले के खुले मैदान में जाकर दुर्घटनाग्रस्त हुई थी। इस दुर्घटनास्थल को देखकर उस समय कई तरह के सवाल खड़े हुए थे। वहां बना गड्ढा एक विशालकाय यात्री विमान के आकार की तुलना में काफी छोटा दिखाई दे रहा था। इसके साथ ही, किसी बड़े विमान दुर्घटना में दिखने वाला बड़ा मलबा जैसे पंख, इंजन या धड़ के बड़े टुकड़े वहां उस तरह बिखरे नजर नहीं आए जैसा सामान्य तौर पर होता है। लोग आज भी पूछते हैं कि फ्लाइट 93 उसी जगह पर कैसे गिरी और उसका मलबा इतनी असामान्य स्थिति में क्यों था?

सवाल- बिना किसी विमान की टक्कर के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की वह इमारत कैसे गिरी?
जवाब- 9/11 के घटनाक्रम में सबसे बड़ा अचरज वर्ल्ड ट्रेड सेंटर परिसर की उस ऊंची इमारत को लेकर था, जिससे कोई भी अपहृत विमान सीधे तौर पर नहीं टकराया था। ट्विन टावर्स के गिरने के कई घंटों बाद वह इमारत भी अचानक भरभराकर गिर गई। आधिकारिक तौर पर कहा गया कि आसपास के मलबे और लगी आग से उसकी संरचना कमजोर हो गई थी। लेकिन आम लोगों और जानकारों के बीच यह सवाल लगातार गूंजता रहा है कि क्या केवल आग और सीमित संरचनात्मक क्षति इतने बड़े और मजबूत टॉवर को पूरी तरह से धराशायी करने के लिए पर्याप्त थी?

अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों की चेतावनी प्रणाली पर क्या सवाल उठे?

इस हमले ने अमेरिका के विशाल खुफिया नेटवर्क की क्षमता पर गहरा आघात किया था। उस दिन चार अलग-अलग हवाई अड्डों से हथियारों के साथ संदिग्धों का विमान में सवार होना और नियंत्रण हासिल करना कई सुरक्षा चूकों को दर्शाता है। इतने बड़े पैमाने पर रची गई अंतरराष्ट्रीय साजिश की भनक सुरक्षा तंत्र को समय से पहले क्यों नहीं लगी? इतने संवेदनशील दिन पर हवाई यातायात नियंत्रण और रक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल में इतनी देरी कैसे हो गई कि विमान एक के बाद एक अपने निशानों पर टकराते चले गए और उन्हें रोकने की कोई ठोस कोशिश जमीन से आसमान तक नहीं दिखाई दी।

क्या आधुनिक विमानन तकनीक भी उस दिन बेअसर साबित हुई थी?

यात्री विमानों में ट्रांसपोंडर और उन्नत रडार सिस्टम होते हैं जो किसी भी क्षण विमान की सटीक ऊंचाई, गति और दिशा बताते हैं। आतंकियों ने विमानों के ट्रांसपोंडर बंद कर दिए थे। मगर सवाल उठता है कि ट्रांसपोंडर बंद होते ही प्राथमिक रडार प्रणाली के जरिए तुरंत उनकी खोजबीन क्यों नहीं पूरी हो पाई? नागरिक उड्डयन और सैन्य रडार नेटवर्क के बीच सूचना का आदान-प्रदान इतनी धीमी गति से क्यों हुआ? जब तक पहला टावर जल रहा था, तब तक बाकी विमानों को जमीन पर उतारने या उन्हें खतरे से दूर करने के सख्त कदम तुरंत प्रभावी क्यों नहीं हो सके?

25 साल बाद भी पीड़ितों के परिवारों के मन में क्या टीस है?

हमले में जान गंवाने वाले हजारों लोगों के परिजनों के लिए यह 25 साल किसी भारी पहाड़ की तरह बीते हैं। जिन्होंने अपनों को खोया, उनके मन में आज भी यह दर्द जिंदा है कि अगर सुरक्षा एजेंसियां थोड़ी भी मुस्तैदी दिखातीं तो शायद उनके परिजन बच सकते थे। हर साल जब स्मारक पर मृतकों के नाम पढ़े जाते हैं, तो लोगों की आंखों में आंसू के साथ-साथ यही सवाल तैरते हैं कि उस दिन की लापरवाही का असली जिम्मेदार कौन था। क्या उन सभी सवालों के जवाब कभी पूरी सच्चाई के साथ सामने आ पाएंगे जो पीड़ित परिवार इतने दशकों से पूछ रहे हैं?

इस घटना ने आम यात्रियों की जिंदगी और हवाई सुरक्षा को कैसे बदला?

9/11 के बाद पूरी दुनिया में हवाई यात्रा का तरीका पूरी तरह से बदल गया। कड़े सुरक्षा नियम, घंटों की जांच और हर यात्री पर कड़ी निगरानी आम बात हो गई। कॉकपिट के दरवाजों को बुलेटप्रूफ और अभेद्य बनाया गया ताकि कोई अंदर न घुस सके। लेकिन यह सारी सख्ती और चौकसी उस दिन की नाकामी के बाद ही क्यों जागी? पहले से मौजूद सुरक्षा प्रोटोकॉल इतने ढीले क्यों थे कि आतंकी चाकू और अन्य वस्तुएं लेकर विमान के अंदर तक पहुंच गए? यह सवाल दिखाता है कि बड़ी तबाही से पहले दुनिया खतरों को लेकर कितनी लापरवाह थी।
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