6 अगस्त और 9 अगस्त 1945, यह वह दो तारीखें हैं, जब पूरी दुनिया को परमाणु बमों के जोखिम और इनके इस्तेमाल से होने वाले सर्वनाश का पहली और आखिरी बार पता चला था। जहां पहली तारीख हिरोशिमा में अमेरिकी परमाणु हमले की है तो वहीं दूसरी तारीख अमेरिका के ही नागासाकी पर हमले की है। दोनों ही घटनाओं में 1.5 लाख से 2.5 लाख लोगों की जान चली गई थी। आज इन घटनाओं को 81 साल पूरे हो चुके हैं। आइये जानते हैं दुनिया के दो पहले और आखिरी परमाणु हमलों के बारे में।
जापान में रोज की तरह एक सामान्य सुबह हुई थी। हर कोई अपने रोजमर्रा के काम को निपटा रहा था। कई लोग दफ्तर जा रहे थे। बच्चे स्कूल में पढ़ रहे थे। तभी जापानी समय के अनुसार 8:15 पर हिरोशिमा शहर के बीच में एक तेज धमाका हुआ, आंखों को अंधा कर देने वाली तेज रोशनी चमकी, आसमान की तरफ एक बड़ा धुएं का गुबार उठा और सब कुछ तबाह हो गया। इस सुबह ने हिरोशिमा के लोगों की जिंदगी में तबाही मचा दी। एक झटके में हजारों लोग मारे गए। यह हिरोशिमा पर परमाणु हमला था जो अमेरिका की तरफ से कराया गया था।
इसके बाद 9 अगस्त 1945 को अमेरिका ने जापान के एक और शहर नागासाकी पर दूसरा परमाणु हमला किया। इन दोनों हमले में लाखों निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। इस हमला इतना भयानक था कि धमाके की आवाज से लोग बहरे हो गए। इसकी तेज रोशनी ने लोगों की अंधा कर दिया। धमाके से उत्पन्न होने वाली गर्मी से लोगों का चमड़ी पिघल गई थी।
6 अगस्त और 9 अगस्त 1945, यह वह दो तारीखें हैं, जब पूरी दुनिया को परमाणु बमों के जोखिम और इनके इस्तेमाल से होने वाले सर्वनाश का पहली और आखिरी बार पता चला था। जहां पहली तारीख हिरोशिमा में अमेरिकी परमाणु हमले की है तो वहीं दूसरी तारीख अमेरिका के ही नागासाकी पर हमले की है। दोनों ही घटनाओं में 1.5 लाख से 2.5 लाख लोगों की जान चली गई थी। आज इन घटनाओं को 81 साल पूरे हो चुके हैं। आइये जानते हैं दुनिया के दो पहले और आखिरी परमाणु हमलों के बारे में।
जापान में रोज की तरह एक सामान्य सुबह हुई थी। हर कोई अपने रोजमर्रा के काम को निपटा रहा था। कई लोग दफ्तर जा रहे थे। बच्चे स्कूल में पढ़ रहे थे। तभी जापानी समय के अनुसार 8:15 पर हिरोशिमा शहर के बीच में एक तेज धमाका हुआ, आंखों को अंधा कर देने वाली तेज रोशनी चमकी, आसमान की तरफ एक बड़ा धुएं का गुबार उठा और सब कुछ तबाह हो गया। इस सुबह ने हिरोशिमा के लोगों की जिंदगी में तबाही मचा दी। एक झटके में हजारों लोग मारे गए। यह हिरोशिमा पर परमाणु हमला था जो अमेरिका की तरफ से कराया गया था।
इसके बाद 9 अगस्त 1945 को अमेरिका ने जापान के एक और शहर नागासाकी पर दूसरा परमाणु हमला किया। इन दोनों हमले में लाखों निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। इस हमला इतना भयानक था कि धमाके की आवाज से लोग बहरे हो गए। इसकी तेज रोशनी ने लोगों की अंधा कर दिया। धमाके से उत्पन्न होने वाली गर्मी से लोगों का चमड़ी पिघल गई थी।
नागासाकी, क्यूशू के पश्चिमी तट पर एक औद्योगिक केंद्र और प्रमुख बंदरगाह था। हिरोशिमा की तरह, बी-29 द्वारा बमबारी शुरू करने से पहले ही सुबह-सुबह हवाई हमले की चेतावनी साफ हो चुकी थी। 1 अगस्त को नागासाकी पर एक छोटे से हमले से शहर के कुछ हिस्सों को, खासकर स्कूली बच्चों को, खाली करना पड़ा था। जब बम फटा, तब शहर में लगभग 2,00,000 लोग मौजूद थे। जल्दबाजी में दागे गए इस बम का विस्फोट शहर के दो प्रमुख ठिकानों, दक्षिण में मित्सुबिशी स्टील एंड आर्म्स वर्क्स और उत्तर में मित्सुबिशी-उराकामी टॉरपीडो वर्क्स के ठीक बीच हुआ। अगर बम दक्षिण में और आगे फटता, तो शहर के आवासीय और व्यावसायिक केंद्रों को कहीं ज़्यादा नुकसान होता।
बताया जाता है कि फैटमैन का धमाका लिटिल बॉय से ज्यादा तेज था, लेकिन नागासाकी में हिरोशिमा जितना नुकसान नहीं हुआ था। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि नागासाकी के आसपास पहाड़ियां है। जिसने बम का विस्फोट, गर्मी और रेडिएशन के प्रभाव को कम करने का काम किया। विस्फोट ने लगभग 43 वर्ग मील के कुल क्षेत्र को प्रभावित किया। विस्फोट स्थल से एक किलोमीटर (0.62 मील) के अंदर आदमी और जानवर लगभग तुरंत मर गए। इनमें से लगभग 8.5 वर्ग मील जलमग्न था, और 33 वर्ग मील क्षेत्र थोड़ा बसा हुआ था। कई सड़कें और रेल लाइनें ज़्यादा नुकसान से बच गईं। डेढ़ मील के दायरे में लगभग सभी घर पूरी तरह ध्वस्त हो गए थे। नागासाकी के 52,000 घरों में से 14,000 नष्ट हो गए और 5,400 गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए थे। केवल 12 प्रतिशत घर ही सुरक्षित बच पाए। पानी की लाइने टूटने से आग बुझाने के काम में बाधा आई, और छह हफ़्ते बाद भी शहर पानी की कमी से जूझ रहा था।
अमेरिका हिरोशिमा पर ही क्यों किया पहला परमाणु हमला
अब बात करते हैं कि आखिर हिरोशिमा को ही क्यों निशाना बनाया था? दरअसल, द्वितीय विश्व युद्ध के समय यह शहर जापान का अहम सैन्य ठिकाना था। इसके अलावा कहा जाता है कि अमेरिका ने ज्यादा आबादी वाले जापानी द्वीपों को निशाना बनाने से परहेज किया गया था। यही वजह है कि यहां परमाणु बम गिराया गया, जिसने इस शहर को पूरी तरह तबाह कर दिया।