विदेश मंत्री जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी और अस्थायी सदस्यता के विस्तार का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के बाद से इतिहास द्वारा उन्मुक्त शक्तियों ने इस निकाय को आगे बढ़ाया है। जैसे-जैसे उपनिवेशवाद का अंत हुआ, दुनिया अपनी प्राकृतिक विविधता की ओर लौटने लगी। संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता चौगुनी हो गई और संगठन की भूमिका और कार्यक्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। वैश्वीकरण के युग में, इसका एजेंडा और भी विकसित हुआ। विकास लक्ष्य केंद्र में आ गए, जबकि जलवायु परिवर्तन एक साझा प्राथमिकता के रूप में उभरा। व्यापार को अधिक प्रमुखता मिली, जबकि खाद्य और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच को वैश्विक कल्याण के लिए आवश्यक माना गया।
यूएन महासभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में औद्योगिक स्तर पर आतंकवादी ठिकाने संचालित हो रहे हैं और आतंकियों को सार्वजनिक रूप से महिमामंडित किया जाता है। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के वित्तीय संसाधनों को पूरी तरह से बंद करना आवश्यक है। उनका यह बयान आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त नीति को स्पष्ट करता है।
यूएन महासभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने टैरिफ अस्थिरता और बाजार तक अनिश्चित पहुंच को भारत के लिए गंभीर चुनौती बताया। उनका यह बयान अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ नीतियों के परिप्रेक्ष्य में आया। जयशंकर ने वैश्विक व्यापार में स्थिरता और न्यायसंगत नियमों के महत्व पर जोर दिया। उनका संदेश यह था कि व्यापारिक नीति में पारदर्शिता और पूर्वानुमेयता सुनिश्चित करनी होगी।
जयशंकर ने अपने संबोधन की शुरुआत में अंग्रेजी में कहा, 'नमस्कार फ्रॉम द पीपल ऑफ भारत'। यानी वो भारत के लोगों की ओर से सभी को नमस्कार करत हैं। इसमें गौर करने वाली बात ये है कि अंग्रेजी में भी बोलते हुए जयशंकर ने वैश्विक मंच पर देश को भारत कहकर संबोधित किया।
इस दौरान विदेश मंत्री ने भारत की वैश्विक भूमिका और पड़ोसी देशों की सहायता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत ने हाल की भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय अफगानिस्तान और म्यांमार की जनता की मदद की। इसके साथ ही भारत ने उत्तरी अरब सागर में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने, समुद्री डकैती रोकने और शिपिंग पर हमलों को रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जयशंकर ने भारत की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों की व्यापकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिक शांति बनाए रखते हैं, नौसेना जहाजों की सुरक्षा करती है, सुरक्षा बल आतंकवाद का मुकाबला करते हैं, डॉक्टर और शिक्षक वैश्विक मानव विकास में योगदान देते हैं, उद्योग किफायती उत्पाद तैयार करता है और तकनीकी विशेषज्ञ डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देते हैं। इसके साथ ही भारत के प्रशिक्षण संस्थान दुनिया के लिए खुले हैं।
उनका यह भाषण भारत की विदेश नीति की केंद्रीय प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है, जिसमें शांति, सुरक्षा, मानवीय सहायता और वैश्विक विकास को बढ़ावा देना शामिल है। जयशंकर ने वैश्विक नेताओं को याद दिलाया कि भारत केवल अपने क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देता है।
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 80वें संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में पाकिस्तान पर तीखा हमला करते हुए इसे वैश्विक आतंकवाद का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के कारण दशकों से अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी हमलों की श्रृंखला जारी रही है और संयुक्त राष्ट्र की आतंकवादियों की सूची में इसके कई नागरिक शामिल हैं। जयशंकर ने इस वर्ष अप्रैल में पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों की हत्या को हालिया उदाहरण के रूप में पेश किया।
जयशंकर ने कहा कि भारत ने स्वतंत्रता के बाद से ही आतंकवाद से निपटना जारी रखा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है, क्योंकि यह घृणा, हिंसा, असहिष्णुता और भय का मिश्रण है। उन्होंने कहा कि जब कोई राष्ट्र आतंकवाद को राज्य नीति के रूप में अपनाता है, आतंकवादी केंद्र औद्योगिक स्तर पर संचालित होते हैं और आतंकियों को सार्वजनिक रूप से महिमामंडित किया जाता है, तो ऐसे कार्यों की कड़ी निंदा होनी चाहिए।
विदेश मंत्री ने आतंकवाद के वित्तपोषण को पूरी तरह बंद करने, प्रमुख आतंकियों पर प्रतिबंध लगाने और पूरे आतंकवादी तंत्र पर लगातार दबाव बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि जो देश या संस्था आतंक को बढ़ावा देने वाले देशों का समर्थन करेंगे, उन्हें इसका नकारात्मक परिणाम भुगतना पड़ेगा। जयशंकर का यह भाषण भारत की आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति और वैश्विक सुरक्षा में सक्रिय भूमिका को स्पष्ट करता है।