आठ वर्षीय लिसीप्रिया कंगुजम को जलवायु परिवर्तन को लेकर उनके जुनून के लिए 'भारतीय ग्रेटा' के नाम से भी जाना जाता है। लिसीप्रिया का मानना है कि वैश्विक नेताओं को उनके द्वारा कही गई बातों पर तुरंत कार्य करने की जरुरत है।
कॉप-25 (COP25) जलवायु सम्मेलन को संबोधित करते हुए लिसीप्रिया ने कहा कि दुनिया को उनके संकल्प की एक झलक दी। उन्होंने वैश्विक नेताओं से आग्रह किया कि वो जलवायु परिवर्तन के खिलाफ तुरंत काम करें।
कंगुजम जलवायु परिवर्तन पर 21 देशों में अब तक अपनी बात रख चुकी हैं। नन्हीं कंगुजम स्पेन के अखबारों में तुरंत सुर्खियों में आ गईं। यहां के अखबारों ने उसे ग्लोब के दक्षिणी की ‘ग्रेटा’ बताया।
ग्रेटा कंगुजम को इतनी समझदारी से बोलते हुए देख कर कहीं से ऐसा नहीं लगता कि उसकी जितनी उम्र की बच्ची इस तरह की बातें कर सकती हैं। उनके पिता केके सिंह उनके साथ स्पेन आए हैं। सिंह ने बताया कि जब कंगुजम को कॉप-25 कार्यक्रम में हिस्सा लेने और उसे संबोधित करने का न्योता संयुक्त राष्ट्र से मिला, तो उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वे अपनी स्पेन की यात्रा के लिए पैसे कहां से लाएंगे।
सिंह ने कहा कि परिवार ने इसके लिए कई मंत्रियों को ईमेल कर यात्रा खर्च उठाने का अनुरोध किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने बताया कि यात्रा के लिए ‘क्राउडफंडिंग’ करने की कोशिश के बाद भुवनेश्वर से एक व्यक्ति उनकी यात्रा का खर्ज उठाया।
कंगुजम ने कहा कि मेरी मां ने अपनी सोने की चेन बेच दी और मेरे लिए होटल भी बुक हो गया। इसबीच, मैड्रिड के लिए भारत से रवाना होने से एक दिन पहले 30 नवंबर को उन्हें स्पेन की सरकार से ईमेल आया कि सरकार उनके 13 दिन की यात्रा का खर्च वहन करेगी।
संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन कॉप- 25 दो दिसंबर से 13 दिसंबर तक स्पेन की राजधानी में आयोजित हो रहा है।