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संकट: यूरोप के 70% किसान मौसमी आपदा बीमा सुरक्षा से वंचित, आपदाओं से हर साल फसल-पशुधन की होती है भारी क्षति

Tue, 27 May 2025 06:18 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

यूरोप जैसे समृद्ध महाद्वीप में भी सूखा, बाढ़ और ओलावृष्टि जैसी मौसमी आपदाओं से हर साल फसल और पशुधन को भारी क्षति होती है। दुर्भाग्यवश, इन आपदाओं से होने वाले कुल नुकसान का करीब 70 फीसदी हिस्सा किसानों को बिना किसी बीमा या मुआवजे के स्वयं ही वहन करना पड़ता है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : freepic
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विस्तार
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जलवायु परिवर्तन का खेती पर असर अब इतना स्पष्ट और गंभीर हो गया है कि इसने किसानों को संकट झेलने पर मजबूर कर दिया है। यह समस्या केवल विकासशील देशों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब विकसित राष्ट्रों में भी इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहा है।

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यूरोप जैसे समृद्ध महाद्वीप में भी सूखा, बाढ़ और ओलावृष्टि जैसी मौसमी आपदाओं से हर साल फसल और पशुधन को भारी क्षति होती है। दुर्भाग्यवश, इन आपदाओं से होने वाले कुल नुकसान का करीब 70 फीसदी हिस्सा किसानों को बिना किसी बीमा या मुआवजे के स्वयं ही वहन करना पड़ता है। यूरोपीय निवेश बैंक (ईआईबी) और यूरोपीय आयोग द्वारा तैयार की गई एक संयुक्त रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि कृषि को जलवायु संबंधी खतरों से सुरक्षित बनाना है तो बीमा बेहद जरूरी है। रिपोर्ट के अनुसार यूरोप के कृषि क्षेत्र को हर वर्ष औसतन 28.3 अरब यूरो (करीब 2.55 लाख करोड़ रुपये) का नुकसान होता है, जो कुल उत्पादन का लगभग 6% है। यदि समय रहते उपाय नहीं किए गए, तो 2050 तक यह नुकसान मौजूदा 42% से बढ़कर 66% तक पहुंच सकता है। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जलवायु जनित कृषि नुकसान का केवल 20 से 30% हिस्सा ही बीमा के अंतर्गत आता है।

कृषि क्षेत्र को जलवायु अनुकूल बनाना जरूरी
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि यूरोपीय संघ को ‘कैटास्ट्रोफ बॉन्ड्स’, सरकारी व निजी क्षेत्र की बीमा साझेदारी और त्वरित राहत वितरण प्रणाली जैसे विकल्पों को अपनाना चाहिए, जिससे आपदा की स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके। साथ ही सिर्फ बीमा पर निर्भर न रहकर कृषि क्षेत्र को जलवायु अनुकूल बनाने की दिशा में भी कदम उठाने की आवश्यकता है।
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भारत में 30 फीसदी फसल क्षेत्र बीमा कवरेज दायरे में
भारत में वर्ष 2016 से लागू प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तहत वर्तमान में लगभग 30% फसल क्षेत्र ही बीमा सुरक्षा के अंतर्गत आता है, जबकि इस योजना का लक्ष्य 2019 तक 50% कवरेज प्राप्त करना था। फिलहाल यह योजना 21 राज्यों में संचालित है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, हालांकि यह योजना स्वैच्छिक है, लेकिन 2023-24 के दौरान गैर-ऋणी किसानों की भागीदारी बढ़कर कुल प्रतिभागियों का 55% हो गई, जो इसकी लोकप्रियता को दर्शाता है।

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