फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

देखते-देखते इतनी बदल गई रिपब्लिकन पार्टी! डोनाल्ड ट्रंप की हार के बाद बदली परिस्थितियां

Mon, 01 Mar 2021 05:53 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

सर्वे में रिपब्लिकन पार्टी के 55 फीसदी समर्थकों ने कहा कि वे 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप को पार्टी का उम्मीदवार बनाने का समर्थन करेंगे। 95 फीसदी रिपब्लिकन समर्थकों ने कहा कि पार्टी को ट्रंप के एजेंडे और नीतियों पर ही आगे बढ़ाना चाहिए...
विज्ञापन
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : PTI (फाइल फोटो)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कंजरवेटिव पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (सीपीएसी) के अधिवेशन ने ये साफ कर दिया कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका में एक सशक्त राजनीतिक शक्ति बने हुए हैं। इससे यह भी साफ हुआ कि रिपब्लिकन पार्टी अब हर व्यावहारिक अर्थ में ट्रंप की पार्टी है। सम्मेलन की समाप्ति के तुरंत बाद कराए गए फौरी सर्वे में रिपब्लिकन पार्टी के 55 फीसदी समर्थकों ने कहा कि वे 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप को पार्टी का उम्मीदवार बनाने का समर्थन करेंगे। 95 फीसदी रिपब्लिकन समर्थकों ने कहा कि पार्टी को ट्रंप के एजेंडे और नीतियों पर ही आगे बढ़ाना चाहिए।

विज्ञापन


सीपीएसी का अधिवेशन रिपब्लिकन पार्टी और उसके समर्थकों का सबसे बड़ा सालाना जलसा होता है। इस बार ये साफ जाहिर हुई कि सीपीएसी में ट्रंप विरोधी आवाजें लगभग गैर-मौजूद हो गई हैं। वेबसाइट द हिल.कॉम के मुताबिक फौरी सर्वे में सिर्फ तीन फीसदी रिपब्लिकन समर्थकों ने कहा कि पार्टी को ट्रंप की राह छोड़ कर नई दिशा अपनानी चाहिए। दो फीसदी समर्थकों ने कहा कि पार्टी को किस रास्ते पर जाना चाहिए, इसको लेकर उनकी कोई पक्की राय नहीं है।

विश्लेषकों का कहना है कि इस सम्मेलन ने पुष्टि कर दी कि रिपब्लिकन पार्टी अब उस रास्ते से पूरी तरह हट चुकी है, जिस पर वह पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रेगन के युग से चल रही थी। ये सम्मेलन अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप की हार के लगभग चार महीनों के बाद हुआ। लेकिन यहां चुनाव में धांधली और गलत तरीके से ट्रंप को हराने की बातें हावी रहीं। कंजरवेटिव कार्यकर्ता और युवा आंदोलन- टर्निंग प्वाइंट- के संस्थापक चार्ली किर्क ने वेबसाइट पोलिटिको.कॉम से कहा- ‘दो बातें हैं जिनकी आज जमीनी कंजरवेटिव कार्यकर्ता चिंता कर रहे हैं। पहली बात यह है कि चुनावी साख बहाल करना ताकि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव हो सकें। और दूसरी बात यह है कि बड़ी टेक कंपनियों को चुनौती देना, ताकि कंजरवेटिव तबके भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर आजादी के साथ अपनी बातें रख सकें।’
विज्ञापन


रिपब्लिकन पार्टी में ट्रंप विरोधी सीनेटर मिट रोमनी के पूर्व सलाहकार केविन मैडेन ने कहा है- ‘रिपब्लिकन पार्टी अब ट्रंप के रूप में ढल चुकी है। उसने ट्रंप के संदेशों और तौर-तरीकों को स्वीकार कर लिया है। यह ऐसी पार्टी बन गई है, जो खुद को सिर्फ इस बात से परिभाषित करती है कि वह किसके खिलाफ है।’ यानी ट्रंप के दौर में रिपब्लिकन पार्टी के पास कोई सकारात्मक एजेंडा नहीं है।

जिन राज्यों में रिपब्लिकन पार्टी की सरकारें हैं, उन्होंने अपने स्तर पर चुनाव में कथित सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बीते मंगलवार को जॉर्जिया राज्य के सीनेट ने एक बिल को मंजूरी दी, जिसमें डाक से वोट भेजने की अर्जी देने वाले के लिए अपना पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य करने का प्रावधान है। ये बिल पास होने के बाद आयोवा, मिसौरी और वायोमिंग राज्यों में भी ऐसे कदम की पहल कर दी गई।

जबकि पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्लू बुश के दौर में अटार्नी जनरल रहे अल्बर्तो गोंजालेज ने कहा है- ‘चुनाव की साख बनी रहे इसकी चिंता हर अमेरिकी को करनी चाहिए। लेकिन पिछले चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली हुई, इसके कोई सबूत नहीं हैं। इस मुद्दे पर रिपब्लिकन पार्टी के अपना ध्यान केंद्रित करने का मतलब है कि वह अधिक जरूरी मुद्दों से लोगों का ध्यान भटका रही है।’

जनकारों का कहना है कि सीएसीपी पहले रिपब्लिकन पार्टी के लिए सकारात्मक कंजरवेटिव एजेंडा तय करती थी। लेकिन इस बार सारा ध्यान चुनावी धांधली और चीन के खिलाफ मोर्चाबंदी से जुड़े कदमों पर केंद्रित रहा। ये वो मुद्दे हैं, जिन्हें डोनाल्ड ट्रंप उठाते रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के सहयोगी और पूर्व राष्ट्रपति रॉनल्ड रेगन के स्पीचराइटर रह चुके केन खचिगियन ने सीएसीपी के सम्मेलन के बाद कहा कि आज रिपब्लिकन पार्टी में एक भी आवाज वैसी नहीं है, जैसी रेगन के जमाने थी।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें