नेपाल में लॉकडाउन की वजह से करीब 500 पर्वतारोही अलग-अलग पर्वत ऋंखलाओं में फंस गए हैं। नेपाल टूरिज्म बोर्ड का कहना है कि अभी पर्वतारोहियों की सही संख्या नहीं बताई जा सकती लेकिन ये कोशिश हो रही है कि स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर सभी पर्वतारोहियों को सुरक्षित वापस लाया जा सके।
नेपाल टूरिज्म बोर्ड की ब्रंड मैनेजर श्रद्धा श्रेष्ठा के मुताबिक जॉमसॉम में करीब 150, लुकला में 250, लंगटंग में आठ, संखवासभा में सात के अलावा मनास्लु और सोलू पर्वतीय ऋंखलाओं में करीब सौ पर्वतारोहियों के फंसे होने की आशंका है। गौरतलब है कि नेपाल में हिमालय की तमाम चोटियां और पर्वत ऋंखलाएं हैं और पर्वतारोहियों के लिए यह सबसे बेहतर ठिकाना है। श्रेष्ठा का कहना है कि बोर्ड ने देश के गृह मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन से अनुरोध किया है कि वह लॉकडॉउन को देखते हुए इन पर्वतारोहियों के लिए पास और घर छोड़ने के लिए ट्रांसपोर्ट का बंदोबस्त करें ताकि उन्हें इस कठिन वक्त में सुरक्षित वापस लाया जा सके। हालांकि अभी तक गृह मंत्रालय ने इसका कोई जवाब नहीं दिया है।
बोर्ड के एक अन्य अधिकारी सुधान सुबेदी ने कहा कि इनमें अलग-अलग देशों के कई पर्यटक हैं जो अकेले अपने शौक की वजह से यहां आए हैं। इसलिए हमने उन तमाम देशों के उच्चायोगों से अपील की है कि वह भी अपने नागरिकों को वापस लाने के लिए पहल करें और सरकार से उचित रास्ता निकालने को कहें।
उधर, ट्रैकिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ नेपाल (टान) की जनरल सेक्रेट्री सरिता लामा ने सफाई दी है कि एसोसिएशन ने 20 मार्च को ही सभी एजेंसियों को निर्देश दे दिए थे कि वह अपने अपने पर्वतारोहियों को तत्काल आगे बढ़ने से रोकें और जल्द से जल्द वापस काठमांडू बुला लें। इसके 6 दिन बाद भी अभी तक सैकड़ों पर्वतारोही वापस नहीं आ सके हैं। लामा ने उम्मीद जाहिर की है कि सभी पर्वतारोही सुरक्षित काठमांडू पहुंच जाएंगे।