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नेपाल में फिर कुदरत का कहर: बाढ़ के साथ बहते दिखे घर और पुल, बचाव दल ने 95 लोगों को बचाया, पांच अभी भी लापता

Mon, 12 Oct 2026 12:41 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, काठमांडू

सार

नेपाल के गोरखा जिले में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के बाद पांच लोग लापता हैं, जिनमें दो महिलाएं शामिल हैं। नेपाली सेना और बचाव दल अब तक 95 लोगों को सुरक्षित निकाल चुके हैं। आपदा में 45 घर पूरी तरह तबाह हुए हैं, जबकि 27 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। 

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नेपाल के गोरखा जिले में आई बाढ़ - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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नेपाल में भारी बारिश के बाद आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। गोरखा जिले में बाढ़ का पानी घरों और पुलों को बहा ले गया, जबकि पांच लोग अब भी लापता हैं। उनकी तलाश में बचाव अभियान लगातार चलाया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित इलाकों से 13 और लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। इसके साथ ही अब तक कुल 95 लोगों को बचाया जा चुका है। नेपाली सेना, सुरक्षा बल और बचाव दल प्रभावित इलाकों में लोगों की तलाश करने के साथ-साथ राहत सामग्री पहुंचाने में जुटे हैं।

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हेलिकॉप्टर से किया गया रेस्क्यू
नेपाली सेना के मुताबिक, गोरखा जिले के चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान जारी है। रविवार शाम उंगिलुंग नदी के पास धौलीभीर इलाके में फंसे तीन लोगों को सेना के हेलिकॉप्टर की मदद से सुरक्षित निकाला गया। यह इलाका चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका-6 में आता है। चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी नारायण सापकोटा ने बताया कि रविवार सुबह अचानक हुए भूस्खलन के बाद तीनों लोग वहां फंस गए थे। उस जगह पर उनका मवेशियों को रखने का बाड़ा था। बाद में सेना के हेलिकॉप्टर से उन्हें सुरक्षित फिलिम पहुंचाया गया। रविवार शाम तक चार हेलिकॉप्टरों, जिनमें एक MI-17 हेलिकॉप्टर भी शामिल था, और जमीन पर काम कर रही बचाव टीमों की मदद से 95 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। राहत और बचाव कार्य में 700 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है। इनमें नेपाली सेना के 171 जवान भी शामिल हैं।

किस इलाके से कितने लोगों को बचाया गया?
'द राइजिंग नेपाल' अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग इलाकों से लोगों को निकालने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया गया। बचाए गए लोगों में जगत से 17, यारू से 22, थुलोधुंगा से 13, दोभान से तीन, फिलिम से दो, न्याकफेदी से 17, पायु से 12, नामरुंग से तीन, डेंग से तीन और धौली से तीन लोग शामिल हैं। सेना और बचाव दल प्रभावित इलाकों में लगातार तलाशी ले रहे हैं, ताकि लापता लोगों का पता लगाया जा सके। पहाड़ी क्षेत्र होने और भूस्खलन के खतरे के कारण राहत कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
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45 घर पूरी तरह तबाह, पुलों और बिजली परियोजनाओं को भी नुकसान
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, इस आपदा में पांच लोग अब भी लापता हैं। इनमें दो महिलाएं शामिल हैं। बाढ़ और भूस्खलन ने इलाके के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। दो झूला पुल और दो मोटर वाहन पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इसके अलावा तीन जलविद्युत परियोजनाओं और मवेशियों को रखने के 34 बाड़ों को भी नुकसान पहुंचा है। प्राधिकरण के अनुसार, 45 घर पूरी तरह तबाह हो गए, जबकि 27 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। तीन वाहन भी बाढ़ के पानी में बह गए। इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाढ़ ने स्थानीय लोगों की जिंदगी और उनके रोजमर्रा के कामकाज को किस हद तक प्रभावित किया है।

प्रभावित लोगों तक पहुंचाई जा रही राहत सामग्री
बचाव अभियान के साथ-साथ प्रभावित परिवारों की मदद के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में तंबू, कंबल, गद्दे, स्लीपिंग बैग और रसोई में इस्तेमाल होने वाले सामान पहुंचाए हैं। इन चीजों के जरिए उन लोगों को राहत देने की कोशिश की जा रही है, जिनके घर तबाह हो गए हैं या जिन्हें सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। प्रशासन और सुरक्षा बलों की टीमें प्रभावित इलाकों में लोगों की मदद करने और लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं।

अगस्त की आपदा के बाद फिर बाढ़ ने बढ़ाई चिंता
नेपाल में बाढ़ की इस घटना ने एक बार फिर हिमालयी इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इससे पहले 26 अगस्त को भोटेकोशी इलाके में अचानक पानी और मलबे का तेज बहाव आया था। इस आपदा ने रसुवा और सिंधुपालचोक जिलों की बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया था। उस घटना में सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी और हजारों लोग लापता हो गए थे। लगातार हुई इन आपदाओं ने हिमालयी नदियों के किनारे बसे गांवों की कमजोर स्थिति को उजागर किया है। पहाड़ों में भूस्खलन के कारण कई बार नदियों और नालों का रास्ता रुक जाता है। इससे पानी अस्थायी रूप से जमा होने लगता है। जब मलबे से बनी यह रुकावट टूटती है, तो पानी और मलबा अचानक तेज रफ्तार से नीचे की ओर बहता है और रास्ते में आने वाली बस्तियों, पुलों और सड़कों को तबाह कर सकता है।

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आखिर नेपाल में बार-बार क्यों आती है ऐसी तबाही?
नेपाल हिमालयी क्षेत्र में स्थित है, जहां मौसम तेजी से बदल सकता है। भारी बारिश, अचानक आने वाली बाढ़, भूस्खलन और हिमस्खलन यहां रहने वाले लोगों के लिए लगातार खतरा बने रहते हैं। खासकर नदी घाटियों के आसपास बसे गांवों में भूस्खलन से पैदा होने वाली रुकावटें अचानक बाढ़ का कारण बन सकती हैं। ऐसे में समय रहते चेतावनी देना, संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालना और राहत-बचाव व्यवस्था मजबूत रखना बेहद जरूरी है। गोरखा जिले में फिलहाल पांच लापता लोगों की तलाश जारी है। वहीं, बाढ़ से प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने और क्षतिग्रस्त इलाकों में हालात सामान्य करने की कोशिश की जा रही है।

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