पश्चिमी नेपाल के सुदूरपश्चिम प्रांत में गुरुवार को 4.9 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप से किसी भी तरह के नुकसान की तत्काल कोई खबर नहीं है। हालांकि भूकंप के झटकों के चलते लोग घरों से बाहर निकल आए। पिछले महीने भी नेपाल में कई बार भूकंप के झटके महसूस किए गए थे।
राष्ट्रीय भूकंप निगरानी केंद्र के अनुसार, भूकंप सुबह 1:08 बजे दर्ज किया गया, जिसका केंद्र बझांग जिले के दंतोला क्षेत्र में था। बझांग जिला काठमांडू से लगभग 475 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। पड़ोसी जिलों बाजुरा, बैतड़ी और दारचुला में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए।
भूकंप से किसी भी तरह के नुकसान की तत्काल कोई खबर नहीं है। बता दें कि नेपाल सबसे सक्रिय टेक्टोनिक क्षेत्रों (भूकंपीय क्षेत्र IV और V) में से एक में स्थित है, जो बेहद ही संवेदनशील इलाका है। यहां हर साल कई भूकंप आते हैं।
क्यों आता है भूकंप?
पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।
जानें क्या है भूंकप के केंद्र और तीव्रता का मतलब?
भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।